क्रेन मशीन क्या होती है और किस काम आती है
क्रेन वह मशीन है जो भारी सामान उठाकर एक जगह से दूसरी जगह रखती है, लोहे के गर्डर, प्रीकास्ट स्लैब, पाइप, मशीनरी और कंटेनर। कंस्ट्रक्शन साइट, फैक्ट्री, गोदाम, बंदरगाह और पुल-सड़क के प्रोजेक्ट में इसका काम रोज़ का है। हिंदी में इसे उत्तोलक यंत्र कहते हैं, पर बाज़ार में हर कोई क्रेन ही बोलता है (जिसे कुछ लोग किरण मशीन भी लिखते हैं)।
भारत में बिकने वाली ज़्यादातर क्रेन पिक-एंड-कैरी होती हैं, यानी मशीन सामान उठाकर उसी हालत में चल भी सकती है। ACE, Escorts Kubota, Indo Farm और TIL इस बाज़ार की मुख्य कंपनियाँ हैं। बड़े प्रोजेक्ट में ट्रक-माउंटेड, क्रॉलर और टावर क्रेन काम आती हैं, जो ज़्यादातर किराए पर या प्रोजेक्ट के कोटेशन पर ली जाती हैं।
क्रेन कितने प्रकार की होती है
हाइड्रा (पिक-एंड-कैरी क्रेन): सबसे आम क्रेन। सीधी चेसिस, पीछे के पहियों से मुड़ती है, 9 से 25 टन तक। छोटी-मध्यम साइट, फैक्ट्री और गोदाम में रोज़ की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए। मॉडल-वार कीमत और खरीद की पूरी जानकारी हाइड्रा मशीन की कीमत पर अलग से दी है।
फराना (बीच से मुड़ने वाली पिक-एंड-कैरी): यह क्रेन बीच से मुड़ती है, इसलिए तंग जगह में घूमना आसान है और भार लेकर चलते समय ज़्यादा स्थिर रहती है। नाम Terex Franna से आया है; आज ACE की F-सीरीज़, Escorts की F-सीरीज़ और Indo Power की FN-सीरीज़ इसी वर्ग में आती हैं। 15 से 35 टन, कीमत हाइड्रा से ऊपर। प्रीकास्ट, रिफ़ाइनरी-प्लांट और भारी मशीनरी शिफ्टिंग में चलती है।
ट्रक-माउंटेड क्रेन: ट्रक की चेसिस पर लगी क्रेन, जो सड़क से लंबी दूरी खुद तय कर लेती है और साइट पर आउटरिगर खोलकर काम करती है। एक साइट से दूसरी साइट भागने वाले ठेकेदार और क्रेन-किराया कारोबार में यही चलती है।
क्रॉलर क्रेन: पटरी पर चलती है, इसलिए कच्ची ज़मीन पर भी खड़ी रह सकती है और कई सौ टन तक उठाती है। पुल, पावर प्लांट, रिफ़ाइनरी और विंड मिल जैसे भारी प्रोजेक्ट में। ट्रेलर से साइट पर पहुँचाई जाती है।
टावर क्रेन: ऊँची इमारत बनाने के लिए साइट पर खड़ी की जाती है और इमारत के साथ ऊँची होती जाती है। बिल्डर इसे ज़्यादातर प्रोजेक्ट की अवधि के लिए किराए पर लेते हैं।
प्रकार और टन क्षमता के हिसाब से कीमत
| क्रेन का प्रकार |
क्षमता |
किस काम के लिए |
सांकेतिक कीमत (सितंबर 2026) |
| हाइड्रा (पिक-एंड-कैरी) |
9–25 टन |
साइट, फैक्ट्री, गोदाम की रोज़ की लोडिंग |
₹12–34 लाख |
| फराना (बीच से मुड़ने वाली) |
15–35 टन |
प्रीकास्ट, प्लांट, भारी शिफ्टिंग |
₹28–66 लाख |
| ट्रक-माउंटेड क्रेन |
20 टन से सैकड़ों टन तक |
किराया कारोबार, दूर-दूर की साइट |
क्षमता के हिसाब से कोटेशन पर |
| क्रॉलर क्रेन |
कई सौ टन तक |
पुल, पावर प्लांट, विंड मिल |
प्रोजेक्ट के हिसाब से कोटेशन पर |
| टावर क्रेन |
ऊँचाई और भार के हिसाब से |
ऊँची इमारतें |
ज़्यादातर किराए पर |
हाइड्रा और फराना की कीमत टन क्षमता के साथ बढ़ती है, 12 टन की हाइड्रा ₹15–18 लाख में मिलती है, 16 टन की ₹22–26 लाख में, और 23 टन की फराना ₹44–48 लाख में। बाकी तीन प्रकार की क्रेन कैटलॉग कीमत पर नहीं बिकतीं; इनका कोटेशन क्षमता, बूम की लंबाई और डिलीवरी की जगह देखकर बनता है।
सबसे ज़्यादा खोजे जाने वाले मॉडल
पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और तुलना अंग्रेज़ी में यहाँ देखें: क्रेन मशीन के सभी मॉडल और कीमत।
खरीदने से पहले क्या देखें
पहले यह तय कीजिए कि क्रेन को सामान उठाकर चलना है या एक जगह खड़े होकर काम करना है। रोज़ की लोडिंग-अनलोडिंग और साइट के भीतर शिफ्टिंग के लिए हाइड्रा या फराना सही है; एक ही जगह की भारी लिफ्ट के लिए ट्रक-माउंटेड या क्रॉलर क्रेन किराए पर लेना सस्ता पड़ता है।
टन क्षमता का असली मतलब लोड चार्ट में है। 16 टन की क्रेन पूरी बूम लंबाई पर 16 टन नहीं उठाती, जिस दूरी और ऊँचाई पर आपका सामान है, वहाँ की क्षमता देखिए। इसके अलावा अपने ज़िले में सर्विस और स्पेयर पार्ट्स की पहुँच, मशीन का RC-फिटनेस-इंश्योरेंस और ऑपरेटर की उपलब्धता देखिए। ऊपर दी कीमतें एक्स-फैक्ट्री सांकेतिक हैं; ऑन-रोड कीमत में रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और ढुलाई जुड़ते हैं और टैक्स लागू होता है, इसलिए अंतिम कोटेशन अपने राज्य के हिसाब से लें।
फाइनेंस और ईएमआई
ज़्यादातर क्रेन फाइनेंस पर खरीदी जाती हैं। बैंक और NBFC मशीन की कीमत का बड़ा हिस्सा फाइनेंस करते हैं, अवधि आमतौर पर 36 से 60 महीने रहती है, और ब्याज दर आपके प्रोफ़ाइल और डाउन पेमेंट पर तय होती है। किराए पर चलने वाली क्रेन की ईएमआई उसके महीने के किराए से निकल जाए, इतना ही लोन लेना समझदारी है। फाइनेंस विकल्प देखें। दूसरी मशीनों की हिंदी कीमत गाइड यहाँ हैं।
आम सवाल
क्रेन मशीन कितने की आती है?
भारत में क्रेन मशीन की कीमत ₹12 लाख से ₹66 लाख तक है, यह हाइड्रा और फराना जैसी पिक-एंड-कैरी क्रेन की सीमा है। 12 से 16 टन की हाइड्रा ₹15–28 लाख और 15 से 23 टन की फराना ₹28–50 लाख में आती है। ट्रक-माउंटेड, क्रॉलर और टावर क्रेन कोटेशन पर मिलती हैं।
क्रेन कितने प्रकार की होती है?
काम के हिसाब से पाँच मुख्य प्रकार हैं: हाइड्रा (पिक-एंड-कैरी), फराना (बीच से मुड़ने वाली पिक-एंड-कैरी), ट्रक-माउंटेड क्रेन, क्रॉलर क्रेन और टावर क्रेन। हाइड्रा, फराना और ट्रक-माउंटेड को आम बोलचाल में मोबाइल क्रेन कहते हैं, क्योंकि ये सड़क पर खुद चलकर साइट पर पहुँचती हैं।
हाइड्रा और फराना में क्या फर्क है?
दोनों पिक-एंड-कैरी क्रेन हैं। हाइड्रा की चेसिस सीधी होती है और वह पीछे के पहियों से मुड़ती है; फराना बीच से मुड़ती है, इसलिए तंग जगह में घूमना आसान है और भार लेकर चलते समय ज़्यादा स्थिर रहती है। इसी वजह से एक ही टन क्षमता में फराना की कीमत हाइड्रा से ऊपर रहती है, 15 टन की हाइड्रा ₹21–28 लाख में और 15 टन की फराना ₹28–43 लाख में आती है।
मोबाइल क्रेन कितने टन की होती है और कीमत कितनी है?
भारत में सबसे ज़्यादा चलने वाली मोबाइल क्रेन 12 से 35 टन की हाइड्रा और फराना हैं, जिनकी कीमत ₹15 लाख से ₹66 लाख के बीच है। ट्रक-माउंटेड मोबाइल क्रेन 20 टन से सैकड़ों टन तक जाती हैं और इनकी कीमत कोटेशन पर तय होती है।
क्रेन को हिंदी में क्या कहते हैं?
हिंदी में क्रेन को उत्तोलक यंत्र या भारोत्तोलक कहते हैं, पर साइट और बाज़ार में सब क्रेन ही बोलते हैं। छोटी चलने वाली क्रेन को लोग हाइड्रा या फराना नाम से पुकारते हैं, चाहे मशीन किसी भी कंपनी की हो।
टावर क्रेन की कीमत कितनी है?
टावर क्रेन कैटलॉग कीमत पर नहीं बिकती, इसकी कीमत ऊँचाई, जिब की लंबाई और उठाने की क्षमता पर तय होती है और हर प्रोजेक्ट के लिए अलग कोटेशन बनता है। ज़्यादातर बिल्डर इसे खरीदने के बजाय प्रोजेक्ट की अवधि के लिए किराए पर लेते हैं।
पुरानी क्रेन खरीदना ठीक है?
ठीक है, बशर्ते मीटर के घंटे सही हों और कागज़ साफ़ हों। बूम के सेक्शन, विंच की रस्सी, हाइड्रोलिक होज़, टायर और लोड चार्ट के हिसाब से असली उठाने की क्षमता जाँचिए, और पिछले लोन का NOC ज़रूर लीजिए।
कीमतें सांकेतिक हैं और वेरिएंट, राज्य, टैक्स और तारीख के साथ बदलती हैं। खरीदने से पहले अंतिम कोटेशन हमारी टीम से पक्का कर लें। आखिरी अपडेट: सितंबर 2026.