यह पेज उसी क्रम में चलता है जिस क्रम में एक नया ऑपरेटर मशीन को समझता है: पहले पार्ट्स, फिर कैबिन के कंट्रोल, फिर चलाने का तरीका और रोज़ की जाँच।
पोकलेन मशीन में कौन-कौन से मुख्य पार्ट्स होते हैं
मशीन को तीन हिस्सों में बाँटकर देखिए — नीचे का चलने वाला हिस्सा, ऊपर का घूमने वाला हिस्सा, और आगे लगा खुदाई का हिस्सा।
नीचे का हिस्सा अंडरकैरिज कहलाता है — ट्रैक चेन, स्प्रॉकेट, आइडलर और रोलर। यही मशीन को चलाता है और उसका पूरा वज़न ज़मीन पर बाँटता है, इसलिए नरम मिट्टी में मशीन धँसेगी या नहीं, यह इसी हिस्से पर निर्भर करता है। इसके ऊपर पूरा ढाँचा एक बड़े बेयरिंग पर बैठा रहता है और स्लू मोटर उसे 360 डिग्री घुमाती है।
ऊपरी हिस्से में डीज़ल इंजन है, और इंजन के साथ जुड़ा हाइड्रोलिक पंप। पंप तेल को दबाव के साथ कंट्रोल वाल्व तक भेजता है, और वाल्व तय करता है कि वह तेल किस सिलेंडर या किस मोटर तक जाएगा। जॉयस्टिक असल में इसी वाल्व को इशारा करता है।
आगे बूम, आर्म और बकेट लगे रहते हैं, तीनों हाइड्रोलिक सिलेंडरों से चलते हैं — बूम ऊपर-नीचे, आर्म अंदर-बाहर, बकेट मिट्टी काटकर उठाने के लिए। और पीछे लगा काउंटरवेट आगे उठाए गए भार के मुकाबले मशीन को संतुलित रखता है।
21,000 kg के आसपास वज़न वाली मशीनें भारत में सबसे ज़्यादा चलती हैं — जैसे SANY SY215C-9LCS (21,800 kg, 155 HP), Volvo EC215 (21,150 kg, 137 HP) और XCMG XE215i (21,000 kg, 141.4 HP)। इन तीनों में पार्ट्स का क्रम वही है जो ऊपर बताया गया है।
कैबिन में कौन-कौन से कंट्रोल होते हैं
कैबिन में चार चीज़ें सीखनी होती हैं, और बस इतनी ही। दायाँ जॉयस्टिक आगे-पीछे करने पर बूम नीचे और ऊपर होता है, और उसी जॉयस्टिक को दाएँ-बाएँ करने पर बकेट खुलती और मुड़ती है। बायाँ जॉयस्टिक आगे-पीछे करने पर आर्म बाहर और अंदर जाता है, दाएँ-बाएँ करने पर पूरा ऊपरी हिस्सा घूम जाता है।
तीसरी चीज़ ट्रैवल लीवर हैं — दो लीवर या पैडल, हर ट्रैक के लिए एक। दोनों आगे धकेलिए तो मशीन सीधी चलेगी, एक ही धकेलिए तो मुड़ेगी, और दोनों को उलटी दिशा में करने पर मशीन अपनी ही जगह पर घूम जाएगी। चौथी चीज़ थ्रॉटल डायल और वर्क मोड है, यानी इंजन की गति और मशीन का काम करने का मोड। हल्के काम में कम मोड पर चलाने से डीज़ल साफ़ बचता है।
ऊपर बताया गया जॉयस्टिक पैटर्न ISO पैटर्न कहलाता है और भारत में ज़्यादातर मशीनें इसी पर सेट होकर आती हैं। कुछ मशीनों में पैटर्न बदलने की सुविधा होती है, इसलिए नई मशीन पर बैठने से पहले डीलर या पुराने ऑपरेटर से एक बार पैटर्न पक्का कर लीजिए। आदत दूसरे पैटर्न की हो और मशीन तीसरे पर सेट हो, तो पहली ही गलती महँगी पड़ती है।
पोकलेन चलाना कैसे सीखें
सीखने का क्रम यही रखिए: पहले खाली, समतल ज़मीन पर सिर्फ घुमाना और चलाना, फिर बिना मिट्टी के बूम-आर्म-बकेट को हवा में चलाना, उसके बाद खुदाई।
शुरुआत में तीनों लीवर एक साथ चलाने की कोशिश मत कीजिए। पहले एक-एक करके हाथ बैठने दीजिए। असली काम तब शुरू होता है जब आर्म खींचते हुए बकेट मोड़ना एक ही चाल में आने लगे — इसी से खुदाई साफ़ होती है और चक्कर कम लगते हैं। ज़्यादातर नए ऑपरेटर किसी अनुभवी ऑपरेटर के साथ साइट पर बैठकर सीखते हैं, और कई बड़े OEM डीलर अपनी मशीन के साथ ऑपरेटर ट्रेनिंग भी देते हैं — मशीन लेते समय यह ज़रूर पूछिए।
तीन बातें शुरू से पक्की कर लीजिए। मशीन घूमते समय पीछे का हिस्सा भी उतना ही घूमता है, इसलिए पीछे कोई दीवार, गाड़ी या आदमी नहीं होना चाहिए। ढलान पर ट्रैक हमेशा चढ़ाई-उतराई की दिशा में रखिए, आड़े नहीं। और काम खत्म होने पर बकेट ज़मीन पर टिकाकर ही मशीन बंद कीजिए।
रोज़ चलाने से पहले क्या देखें
पाँच मिनट की जाँच से आधे ब्रेकडाउन रुक जाते हैं।
- इंजन ऑयल, कूलेंट और हाइड्रोलिक टैंक का लेवल।
- मशीन के नीचे ज़मीन पर तेल की बूँदें — किसी पाइप या सिलेंडर से रिसाव का पहला इशारा।
- ट्रैक का ढीलापन, और ट्रैक में फँसा पत्थर या तार।
- ग्रीस पॉइंट, खासकर बकेट और आर्म के जोड़ों पर।
- एयर फिल्टर, जो धूल वाली साइट पर सबसे जल्दी भरता है।
कीमत, वज़न वर्ग और मॉडल की जानकारी के लिए पोकलेन मशीन की कीमत और मॉडल पेज देखिए। पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें: excavator components।
आम सवाल
पोकलेन मशीन में कितने जॉयस्टिक होते हैं?
दो जॉयस्टिक होते हैं और उनके साथ दो ट्रैवल लीवर या पैडल। दायाँ जॉयस्टिक बूम और बकेट चलाता है, बायाँ जॉयस्टिक आर्म चलाता है और ऊपरी हिस्से को घुमाता है। ट्रैवल लीवर सिर्फ मशीन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए हैं।
पोकलेन मशीन में ताकत कहाँ से आती है?
डीज़ल इंजन हाइड्रोलिक पंप को घुमाता है, पंप तेल को दबाव के साथ कंट्रोल वाल्व तक भेजता है, और वहाँ से तेल सिलेंडरों और मोटरों तक जाता है। यानी इंजन सीधे बूम या बकेट को नहीं हिलाता — वह तेल का दबाव बनाता है, और काम वही दबाव करता है।
पोकलेन और जेसीबी में क्या फर्क है?
आम बोलचाल में पोकलेन का मतलब चेन (ट्रैक) पर चलने वाली खुदाई मशीन है, जो एक ही जगह खड़े होकर 360 डिग्री घूमती है। जेसीबी से आमतौर पर बैकहो लोडर समझा जाता है, जो पहियों पर चलता है, आगे लोडर बकेट और पीछे खुदाई का हिस्सा रखता है और सड़क पर खुद चलकर जा सकता है।
नई मशीन पर पैटर्न कैसे पता करें?
मशीन चालू करके, बकेट ज़मीन से थोड़ा ऊपर रखकर, बाएँ जॉयस्टिक को धीरे से आगे कीजिए। ISO पैटर्न में आर्म बाहर जाएगा; दूसरे पैटर्न में बूम नीचे आएगा। यह जाँच हमेशा खुली जगह में और धीमी गति से कीजिए।
क्या पोकलेन चलाने के लिए कोई ट्रेनिंग ज़रूरी है?
मशीन साइट पर चलती है, इसलिए सड़क वाले लाइसेंस से इसका सीधा संबंध नहीं है, लेकिन बिना ट्रेनिंग के किसी को मशीन पर मत बैठाइए। अनुभवी ऑपरेटर के साथ काम सीखना और डीलर की ऑपरेटर ट्रेनिंग, दोनों मिलकर सबसे कम खर्च में सबसे तेज़ रास्ता हैं।
जानकारी सांकेतिक है और मॉडल, वेरिएंट तथा तारीख के साथ बदल सकती है। खरीदने या मशीन चलाने से पहले अपने डीलर या OEM से पक्का कर लें।