एक्सकेवेटर या जेसीबी के लिए कौन सा लाइसेंस बनता है?
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 10(2) में लाइसेंस की क्लास गिनाई गई हैं: बिना गियर वाली मोटरसाइकिल, गियर वाली मोटरसाइकिल, इनवैलिड कैरिज, लाइट मोटर व्हीकल, ट्रांसपोर्ट व्हीकल, रोड रोलर, और “किसी खास विवरण वाला मोटर वाहन”।
इस लिस्ट में जो नहीं है, वही गौर करने की बात है। रोड रोलर को अपनी एक अलग क्लास मिली है। बैकहो लोडर और एक्सकेवेटर को नहीं। मतलब, आपकी मशीन की क्लास उसके RC यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में दर्ज विवरण और वजन से तय होगी। यही वजह है कि एक ही सवाल पर अलग-अलग जवाब मिलते हैं। बहस से यह तय नहीं होता। अपने RTO से लिखित में पक्का कराएँ।
क्या घिरी हुई साइट पर भी लाइसेंस चाहिए?
धारा 3 कहती है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर मोटर वाहन तब तक नहीं चला सकता, जब तक उसके पास उस गाड़ी को चलाने का वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो। पूरी बात “सार्वजनिक जगह” पर टिकी है।
मोटर वाहन की परिभाषा ही कुछ मशीनों को बाहर रखती है। धारा 2(28) उन मशीनों को छोड़ देती है जो खास तरह से बनी हों और सिर्फ फैक्ट्री या किसी घिरे हुए परिसर में इस्तेमाल के लिए हों। गेट वाली खदान या घिरा हुआ प्लांट इस दायरे में आता है। पर सड़क चौड़ी करने का काम, नहर की पटरी और गाँव का रास्ता घिरा परिसर नहीं हैं। मशीन एक बार सड़क पर आई, तो तीनों बातें लागू हो गईं।
मशीन का वजन लाइसेंस की क्लास कैसे तय करता है?
कानून में वजन की दो लाइनें हैं। धारा 2(21) के मुताबिक लाइट मोटर व्हीकल का वजन 7,500 kg (7.5 टन) तक होता है, और धारा 2(16) के मुताबिक हेवी गुड्स व्हीकल 12,000 kg (12 टन) से ऊपर का। ये लाइनें मोटर कार, ट्रैक्टर और रोड रोलर पर खाली मशीन के वजन (अनलेडन वेट) से लगती हैं, और ट्रांसपोर्ट व्हीकल पर लदे हुए कुल वजन से।
नीचे लिस्टेड तीन मशीनों का असली वजन रखा है, ताकि दिख जाए कि आम मशीनें इन लाइनों के किस तरफ बैठती हैं।
| मशीन |
कैटलॉग का वजन |
कानून की लाइन के मुकाबले |
| JCB 3DX (बैकहो लोडर) |
7,200 kg (7.2 टन) मशीन वजन |
7,500 kg की लाइन से ज़रा नीचे |
| CASE 1107NX (सॉइल कंपैक्टर) |
11,100 kg (11.1 टन) ऑपरेटिंग वेट |
दोनों लाइनों के बीच; रोड रोलर की अपनी क्लास है |
| Tata Hitachi EX 210 (एक्सकेवेटर) |
20,300 kg (20.3 टन) ऑपरेटिंग वेट |
12,000 kg की लाइन से काफी ऊपर |
एक बात साफ रखें। टेबल का वजन मशीन का चलने लायक वजन है, RC में दर्ज अनलेडन वजन नहीं। क्लास उसी RC की एंट्री से तय होगी, इसलिए नए ऑपरेटर को मशीन देने से पहले कागज़ और लाइसेंस दोनों मिलाकर देखें।
लाइसेंस कैसे बनेगा और कितना खर्च आएगा?
रास्ता आम ड्राइविंग लाइसेंस वाला ही है, बस क्लास सही माँगनी पड़ती है। जिसके पास कुछ नहीं है, वह पहले अपने इलाके के RTO से उस क्लास का लर्निंग लाइसेंस लेता है। वह 30 दिन पुराना होने पर पक्के लाइसेंस के लिए फॉर्म 4 से अर्ज़ी लगती है, और टेस्ट उसी तरह की गाड़ी पर देना होता है जिसकी क्लास चाहिए। जिसके पास पहले से कार का लाइसेंस है, वह नया नहीं बनवाता — वह पुराने लाइसेंस में नई क्लास जुड़वाता है (फॉर्म 2, और ट्रांसपोर्ट क्लास के लिए मेडिकल फॉर्म 1A)।
ट्रेनिंग सेंटर का सर्टिफिकेट इससे अलग चीज़ है। वह बताता है कि आदमी मशीन चलाना जानता है, पर सड़क पर चलाने का हक सिर्फ RTO की दी हुई क्लास से मिलता है।
| काम |
केंद्र सरकार का शुल्क |
| लर्निंग लाइसेंस, हर क्लास के लिए |
₹150 |
| लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट या दोबारा टेस्ट |
₹50 |
| ड्राइविंग टेस्ट, हर क्लास के लिए |
₹300 |
| ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना |
₹200 |
| पुराने लाइसेंस में नई क्लास जोड़ना |
₹500 |
| लाइसेंस रिन्यू कराना |
₹200 |
ये परिवहन सेवा पर दिए केंद्र सरकार के शुल्क हैं, अक्टूबर 2026 तक। राज्य का सेवा शुल्क इनके ऊपर अलग लगता है, और टेस्ट का शुल्क हर क्लास के लिए अलग। अपने RTO से चालू रेट और कागज़ों की लिस्ट एक बार पूछ लें।
उम्र की सीमा क्या है?
धारा 4 छोटी और सख्त है। 18 साल से कम उम्र का कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर मोटर वाहन नहीं चला सकता, और 20 साल से कम उम्र का कोई ट्रांसपोर्ट व्हीकल नहीं। परिवहन सेवा भी यही दोनों उम्र गिनाती है। साइट पर 17 साल का लड़का कितना ही माहिर हो, कानून की नज़र में वह बिना लाइसेंस वाला ड्राइवर है।
ऑपरेटर के पास लाइसेंस न हो तो मालिक पर क्या आता है?
कानून में एक धारा सीधे मालिक के लिए है। धारा 5 कहती है कि कोई मालिक या मशीन का ज़िम्मेदार व्यक्ति ऐसे आदमी को गाड़ी चलाने के लिए नहीं कहेगा और न चलाने देगा, जो धारा 3 या धारा 4 की शर्तें पूरी नहीं करता। “चलाने देने” की सीमा नीची है। कहने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती — ऑपरेटर छुट्टी पर हो और चाबी हेल्पर के हाथ में रह जाए, इतना काफी है। असर अक्सर बीमे की तरफ से आता है, क्योंकि बिना लाइसेंस वाला आदमी क्लेम रोकने की सबसे साफ वजह बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक्सकेवेटर का लाइसेंस कैसे बनता है?
“एक्सकेवेटर लाइसेंस” नाम की कोई क्लास नहीं होती। RTO से मशीन की क्लास का लर्निंग लाइसेंस लें, 30 दिन बाद उसी तरह की गाड़ी पर टेस्ट दें, और पास होने पर उसी क्लास का लाइसेंस मिलता है।
जेसीबी चलाने के लिए कौन सा लाइसेंस चाहिए?
वही क्लास, जो मशीन के RC में दर्ज विवरण और वजन से बनती है। धारा 10(2) में रोड रोलर की अपनी क्लास है, बैकहो लोडर की नहीं, इसलिए क्लास RTO से लिखित में पक्का कराएँ।
क्या कार के लाइसेंस पर जेसीबी चलाई जा सकती है?
सिर्फ तब, जब RTO आपकी मशीन को उसी क्लास में रखता हो। JCB 3DX का वजन 7,200 kg है, यानी 7,500 kg की लाइन के बिल्कुल पास। ऐसे मामले में खुद से मान लेना जोखिम है।
लाइसेंस में कुल खर्च कितना आता है?
केंद्र के शुल्क: लर्निंग लाइसेंस ₹150, उसका टेस्ट ₹50, ड्राइविंग टेस्ट ₹300, लाइसेंस ₹200, और नई क्लास जुड़वाने पर ₹500। राज्य का सेवा शुल्क इनसे अलग लगता है।
घिरी हुई प्राइवेट साइट पर लाइसेंस ज़रूरी है?
धारा 2(28) की परिभाषा घिरे परिसर में चलने वाली खास मशीनों तक नहीं पहुँचती। पर मशीन सार्वजनिक जगह पर आते ही लाइसेंस, उम्र और रजिस्ट्रेशन लागू हो जाते हैं।
आगे क्या देखें
धारा-दर-धारा पूरी बात और वजन की क्लास की पूरी टेबल जेसीबी का लाइसेंस वाले अंग्रेज़ी पेज पर है। मशीन चलाने का तरीका पोकलेन मशीन कैसे चलाते हैं में देखें, और कीमत के लिए जेसीबी (बैकहो लोडर) की कीमत या रोड रोलर की कीमत वाले पेज।
यहाँ दिए शुल्क परिवहन सेवा पर छपे केंद्र सरकार के शुल्क हैं और मशीनों का वजन लिस्टेड मॉडल की स्पेसिफिकेशन से लिया गया है। नियम, लाइसेंस की क्लास, शुल्क और RTO की प्रक्रिया राज्य और समय के साथ बदलती है। किसी ऑपरेटर को मशीन पर बिठाने से पहले अपने RTO से चालू नियम पक्का कर लें। बदली हुई जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।