जिसे हम डामर कहते हैं, वह असल में पेट्रोलियम से बना बिटुमेन है। इस पेज के नियम और नाप सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की सड़क और पुल के काम की शर्तों के पाँचवें संस्करण से लिए गए हैं, और हर नियम के साथ उसकी धारा लिखी है। इस पेज पर कोई कीमत या प्रति किलोमीटर खर्च नहीं दिया गया है।
डामर रोड में कितनी परतें होती हैं?
हाईवे जैसी पूरी डामर रोड में पाँच परतें होती हैं, और हर परत ऊपर से आए पहिए के वज़न को थोड़ा और फैलाकर नीचे भेजती है। नीचे सस्ता स्थानीय माल लगता है, ऊपर महँगा और मज़बूत, क्योंकि वज़न की चोट ऊपर सबसे तेज़ होती है।
| परत (नीचे से ऊपर) |
किससे बनती है |
एक परत की मोटाई |
| सबग्रेड |
साइट की मिट्टी, साफ़ करके और दबाकर |
ऊपर के 500 mm को सबग्रेड माना जाता है |
| जीएसबी (ग्रेनुलर सब-बेस) |
गिट्टी, बजरी और रेत का मेल |
आम तौर पर 200 से 300 mm |
| डब्ल्यूएमएम (वेट मिक्स मैकेडम) |
प्लांट में पानी मिलाई गई कुटी गिट्टी, बिना बिटुमेन |
कम से कम 75 mm (धारा 406.1) |
| डीबीएम (डेंस बिटुमिनस मैकेडम) |
बिटुमेन चढ़ी गिट्टी, गरम बिछाई जाती है |
50 से 100 mm (धारा 505.1) |
| बीसी (बिटुमिनस कंक्रीट) |
बारीक गिट्टी और ज़्यादा बिटुमेन, सबसे ऊपर |
30, 40 या 50 mm (धारा 507.1) |
गिट्टी और डामर की परतों के बीच प्राइम कोट लगता है, और डामर की दो परतों के बीच टैक कोट। इन दोनों का काम नीचे अलग से समझाया गया है। हल्की सड़कों पर एक-दो परतें कम हो जाती हैं, पर क्रम यही रहता है।
डामर रोड बनाने की विधि क्या है?
काम हमेशा नीचे से शुरू होता है, और अगली परत तभी बिछती है जब पिछली परत की जाँच पास हो जाए। क्रम यह है:
- मिट्टी तैयार करना: ऊपर की कमज़ोर मिट्टी और घास हटाई जाती है। फिर सही नमी पर मिट्टी को इतना दबाया जाता है कि वह लैब में निकले सबसे ज़्यादा घनत्व के 97 प्रतिशत तक पहुँच जाए। गर्मी में साइट पर पानी के टैंकर इसी नमी के लिए खड़े रहते हैं।
- जीएसबी बिछाना: ग्रेडर गिट्टी-बजरी को फैलाकर ढलान देता है और सॉयल कॉम्पैक्टर उसे दबाता है। यह परत ताकत के साथ पानी को भी किनारे से बाहर निकालती है।
- डब्ल्यूएमएम बिछाना: गिट्टी में प्लांट पर ही सही मात्रा में पानी मिलाया जाता है, फिर उसे बिछाकर दबाया जाता है। एक दबी हुई परत 75 mm से कम नहीं होती, क्योंकि इससे पतली परत में पत्थर आपस में फँसकर जम नहीं पाते।
- सफ़ाई और प्राइम कोट: मशीनी झाड़ू और कंप्रेसर की हवा से धूल हटाई जाती है, फिर गिट्टी की सतह पर पतला बिटुमेन छिड़का जाता है। इसे कम से कम 24 घंटे सूखने दिया जाता है (धारा 502.4.4)।
- टैक कोट: डामर की हर नई परत से ठीक पहले नीचे की सतह पर बिटुमेन की बहुत पतली परत छिड़की जाती है, ताकि दोनों परतें आपस में चिपकें।
- हॉट मिक्स लाना: प्लांट से गरम मिक्स ढके हुए और गर्मी रोकने वाले ट्रक में आता है (धारा 501.4), ताकि रास्ते में ठंडा न हो।
- पेवर से बिछाना: मिक्स को खुद चलने वाली पेवर मशीन बिछाती है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगा होता है (धारा 501.5.3)। ट्रक इस तरह लगाए जाते हैं कि पेवर बिना रुके चलता रहे। हाथ से फैलाना सिर्फ़ उन कोनों में होता है जहाँ पेवर नहीं पहुँचता।
- रोलिंग: बिछाते ही दबाई शुरू होती है और मिक्स ठंडा होने से पहले पूरी हो जाती है। रोलर किनारे से बीच की तरफ़ चलता है। रोलर चलाने का पूरा तरीका रोड रोलर कैसे चलाते हैं वाले पेज पर है।
- जॉइंट बनाना: जहाँ पिछले दिन का काम खत्म हुआ था, वहाँ ठंडे किनारे को पूरी मोटाई में सीधा काटा जाता है, कटे हिस्से पर गरम बिटुमेन लगाया जाता है, और नया मिक्स उस पर 25 से 50 mm चढ़ाकर बिछाया जाता है (धारा 501.7)।
जॉइंट की दो बातें ठेकेदार अक्सर छोड़ देते हैं। लंबाई वाला जॉइंट पहिए के चलने वाली पट्टी में नहीं होना चाहिए और नीचे की परत के जॉइंट से कम से कम 300 mm हटकर होना चाहिए। आड़ा जॉइंट ऊपर-नीचे की परतों में कम से कम 2 मीटर हटकर होना चाहिए। एक ही लाइन में आए जॉइंट से पानी सीधे नीचे तक उतरता है।
प्राइम कोट और टैक कोट में क्या फर्क है?
प्राइम कोट गिट्टी की खुरदुरी परत को डामर के लिए तैयार करता है, और टैक कोट डामर की दो परतों को आपस में चिपकाता है। दोनों बिटुमेन के पतले छिड़काव हैं, पर जगह, माल और काम अलग है।
| बात |
प्राइम कोट |
टैक कोट |
| कहाँ लगता है |
गिट्टी की परत (डब्ल्यूएमएम या डब्ल्यूबीएम) पर |
पुराने डामर, कंक्रीट या प्राइम की हुई सतह पर |
| किस माल से |
SS1 बिटुमेन इमल्शन या मीडियम क्योरिंग कटबैक |
RS1 बिटुमेन इमल्शन या VG-10 बिटुमेन |
| काम |
गिट्टी में करीब 8 से 10 mm घुसकर ऊपर के छेद भरता है, ढीले पत्थर बाँधता है और सतह को पानी से बचाता है |
नीचे और ऊपर की परत को गोंद की तरह जोड़ता है |
| सूखने का समय |
कम से कम 24 घंटे |
जब तक उसकी नमी और गैस पूरी न उड़ जाए |
| धारा |
502 |
503 |
दोनों की मात्रा प्रति वर्ग मीटर किलो में तय होती है और सतह के हिसाब से बदलती है। ज़्यादा छिड़काव भी नुकसान करता है, क्योंकि फालतू बिटुमेन बाद में सतह पर ऊपर आ जाता है। हर सतह की मात्रा प्राइम कोट और टैक कोट की अंग्रेज़ी गाइड में दी गई है। प्राइम की हुई सतह पर अगली परत बिछाने वाली गाड़ियों के सिवा कोई ट्रैफ़िक नहीं चलता।
डामर रोड किस मौसम में नहीं बनती?
गरम डामर का काम मौसम देखकर रोका जाता है, क्योंकि गीली या ठंडी सतह पर मिक्स चिपकता नहीं और जल्दी ठंडा होकर ठीक से दबता नहीं। धारा 501.5.1 के हिसाब से बिछाई इन हालात में बंद रहती है:
- सतह पर पानी खड़ा हो, बारिश हो रही हो या आने वाली हो
- कोहरा या धूल भरी आँधी हो
- नीचे की परत गीली हो
- जिस सतह पर बिछाना है, वहाँ हवा का तापमान 10°C से कम हो (मॉडिफ़ाइड बिटुमेन वाले मिक्स के लिए 15°C से कम)
- हवा 40 km/h से तेज़ चल रही हो
मिक्स का अपना तापमान भी तय है। जैसे VG-30 बिटुमेन वाला मिक्स कम से कम 140°C पर बिछना चाहिए और उसकी दबाई 90°C से नीचे आने से पहले पूरी होनी चाहिए। हर ग्रेड की पूरी तापमान तालिका हॉट मिक्स प्लांट वाले पेज पर है, और किस मौसम और ट्रैफ़िक में कौन सा ग्रेड चलता है, यह बिटुमेन के ग्रेड वाली गाइड में समझाया गया है।
डामर रोड बनाने वाली मशीन कौन सी है?
डामर रोड कोई एक मशीन नहीं बनाती, बल्कि मशीनों की एक टोली बनाती है जो परत के हिसाब से बदलती है। मिट्टी और गिट्टी की परतों पर मोटर ग्रेडर माल फैलाकर ढलान देता है, सॉयल कॉम्पैक्टर उसे दबाता है और पानी का टैंकर नमी ठीक रखता है। सफ़ाई और छिड़काव के लिए मशीनी झाड़ू, एयर कंप्रेसर और बिटुमेन प्रेशर स्प्रेयर लगते हैं; हाथ वाला स्प्रेयर सिर्फ़ छोटी और तंग जगहों पर चलता है। डामर की परतों के लिए हॉट मिक्स प्लांट, ढके हुए टिपर, पेवर फिनिशर और रोलर चाहिए।
रोलर तीन चरण में चलते हैं (धारा 501.6)। पहली दबाई 8 से 10 टन के स्मूथ व्हील रोलर से होती है। बीच की दबाई उसी वज़न के वाइब्रेटरी रोलर से या 12 से 15 टन के टायर वाले रोलर से होती है, और आखिरी फिनिश 6 से 8 टन के टैंडम रोलर से। हमारी लिस्ट में SANY STR90C-10 PRO 9,200 kg का टैंडम रोलर है, और L&T 2490 HD 12,800 kg का टायर वाला रोलर, जिसका वज़न अतिरिक्त भार (बैलास्ट) डालकर 24,000 kg तक बढ़ाया जा सकता है।
गाँव की डामर सड़क कैसे बनती है?
कम ट्रैफ़िक वाली गाँव की सड़क में डीबीएम और बीसी जैसी मोटी गरम परतें आम तौर पर नहीं होतीं। ऐसी सड़क पर गिट्टी की परत कई जगह डब्ल्यूबीएम (वॉटर बाउंड मैकेडम) होती है: बड़ी गिट्टी, जिसके बीच पत्थर की धूल और पानी भरकर दबाया जाता है, 75 mm की दबी हुई परतों में।
उसके ऊपर प्राइम कोट लगाकर 20 mm की पतली परत बिछाई जाती है, जिसे प्रीमिक्स कार्पेट कहते हैं (धारा 510)। यह छोटी गिट्टी पर बिटुमेन चढ़ाकर बनती है। फिर उसके खाली छेद बंद करने के लिए तुरंत सील कोट लगता है (धारा 511), जो दो तरह का होता है: बिटुमेन छिड़ककर ऊपर पत्थर की बारीक चिप्स दबाना, या रेत जैसी बारीक गिट्टी में बिटुमेन मिलाकर पतली परत बिछाना। सील कोट से पहले इस सड़क पर ट्रैफ़िक नहीं छोड़ा जाता।
डामर रोड जल्दी क्यों टूटती है?
डामर रोड की सबसे आम खराबी, गड्ढे, ज़्यादातर पानी से शुरू होती है, और दूसरी बड़ी वजह गलत मात्रा में बिटुमेन है। सड़क की देखभाल का कोड IRC:82-2015 दो आम खराबियों के ये कारण बताता है:
- गड्ढे: ऊपर की परत में पानी घुस जाए या मिक्स में खाली जगह ज़्यादा हो, तो बिटुमेन गिट्टी को छोड़ देता है। बहुत पतली ऊपरी परत, नीचे की गिट्टी से कमज़ोर पकड़ और सपाट सड़क, जिस पर पानी बहकर किनारे नहीं जाता, इसे और बढ़ाते हैं।
- सतह पर बिटुमेन आना (ब्लीडिंग): सड़क चिकनी और काली चमकने लगती है, गर्मी में नरम और बारिश में फिसलन वाली हो जाती है। इसकी वजह ज़्यादा बिटुमेन, मिक्स में कम खाली जगह, मौसम से नरम ग्रेड या ज़्यादा भारी टैक कोट है।
इसीलिए ऊपर बताए नियम सिर्फ़ कागज़ के लिए नहीं हैं। ढलान, गीली सतह पर काम न करना, सही तापमान और नपा हुआ छिड़काव ही सड़क की उम्र तय करते हैं। हर तरह की खराबी, उसकी पहचान और उसकी मरम्मत सड़क टूटने के प्रकार वाली गाइड में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डामर रोड कैसे बनाते हैं?
पहले मिट्टी दबाई जाती है, फिर गिट्टी की जीएसबी और डब्ल्यूएमएम परतें बिछती हैं। गिट्टी पर प्राइम कोट छिड़ककर 24 घंटे सुखाया जाता है, फिर टैक कोट के बाद गरम डामर पेवर से बिछाकर रोलर से दबाया जाता है।
डामर रोड में कितनी परतें होती हैं?
हाईवे जैसी पूरी सड़क में पाँच: सबग्रेड, जीएसबी, डब्ल्यूएमएम, डीबीएम और बीसी। इनके बीच प्राइम कोट और टैक कोट लगते हैं। गाँव की हल्की सड़क में परतें कम होती हैं और ऊपर 20 mm का प्रीमिक्स कार्पेट और सील कोट होता है।
डामर रोड की मोटाई कितनी होती है?
ऊपर की बीसी परत 30, 40 या 50 mm की होती है, और उसके नीचे की डीबीएम परत 50 से 100 mm की। गाँव की सड़क का प्रीमिक्स कार्पेट 20 mm का होता है। पूरी सड़क की मोटाई मिट्टी की ताकत और ट्रैफ़िक के हिसाब से डिज़ाइन में तय होती है।
बारिश में डामर रोड क्यों नहीं बनाते?
गीली सतह पर गरम बिटुमेन गिट्टी से चिपकता नहीं और मिक्स जल्दी ठंडा हो जाता है, इसलिए परत ठीक से नहीं दबती। ऐसी सड़क में जल्दी गड्ढे पड़ते हैं। इसलिए बारिश, कोहरे, गीली सतह और 10°C से कम तापमान में बिछाई रोक दी जाती है।
नई डामर रोड पर गाड़ी कब चला सकते हैं?
प्रीमिक्स कार्पेट वाली सड़क पर सील कोट लगने से पहले ट्रैफ़िक नहीं चलता। बारीक गिट्टी वाला सील कोट हो तो मिक्स के आसपास के तापमान तक ठंडा होने पर गाड़ी छोड़ी जा सकती है। बिटुमेन और चिप्स वाले सील कोट पर अगले दिन तक गाड़ी नहीं चलती।
आगे क्या देखें
हर परत की मोटाई, मिट्टी की ताकत नापने का सीबीआर टेस्ट और हर परत का माल अंग्रेज़ी में road construction layers वाले पेज पर विस्तार से है। सभी परतों की मोटाई, टेस्ट और पूरी जानकारी अंग्रेज़ी पेज पर देखें। इस पेज के सारे नियम MoRTH की शर्तों के पाँचवें संस्करण की धारा 400 और 500 से हैं।
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