सड़क को बनावट से भी बाँटा जाता है: कच्ची, बजरी वाली, गिट्टी वाली, डामर वाली और सीमेंट कंक्रीट की। इस पेज के सारे नाप इंडियन रोड्स कांग्रेस के कोड IRC:73-2023 और गाँव की सड़कों की किताब IRC:SP:20 से लिए गए हैं।
सड़क कितने प्रकार की होती है?
काम के हिसाब से भारत में पाँच प्रकार की सड़कें नागपुर रोड प्लान से चली आ रही हैं। बाद में एक्सप्रेसवे सबसे ऊपर जुड़ा। तीसरी 20 साला सड़क विकास योजना ने इन्हें तीन प्रणालियों में रखा, और प्रणाली से मोटे तौर पर पता चलता है कि सड़क किसकी ज़िम्मेदारी है।
भारत में सड़क के प्रकार, काम के हिसाब से (IRC:73-2023, टेबल 3.2, 4.1 और 4.2; मैदानी और खुला इलाका)
| सड़क का प्रकार |
प्रणाली |
क्या जोड़ती है |
डिज़ाइन स्पीड (सामान्य / कम से कम) |
सड़क के लिए ज़मीन की चौड़ाई |
| एक्सप्रेसवे |
प्राथमिक |
लंबे रास्ते, तेज़ और भारी ट्रैफिक, सिर्फ इंटरचेंज से चढ़ना-उतरना |
120 km/h (मुख्य लाइन) |
90 से 120 मीटर |
| राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) |
प्राथमिक |
बंदरगाह, राज्यों की राजधानियाँ, बड़े उद्योग और सीमा के रास्ते |
100 / 80 km/h |
दो लेन में 30 मीटर, आठ लेन में 120 मीटर |
| राज्य राजमार्ग (एसएच) |
द्वितीयक |
राज्य के जिला मुख्यालय और बड़े शहर, फिर उन्हें एनएच से |
100 / 80 km/h |
एनएच जितनी, लेन के हिसाब से |
| मुख्य जिला सड़क (एमडीआर) |
द्वितीयक |
जिले की मंडियाँ, पैदावार वाले इलाके और बड़े राजमार्ग |
80 / 65 km/h |
25 मीटर (25 से 30) |
| अन्य जिला सड़क (ओडीआर) |
तृतीयक (ग्रामीण सड़क) |
गाँव के खेत-खलिहान से मंडी, तहसील और ब्लॉक मुख्यालय |
50 / 40 km/h |
15 मीटर (15 से 25) |
| गाँव की सड़क (वीआर) |
तृतीयक (ग्रामीण सड़क) |
गाँव से गाँव और पास की बड़ी सड़क तक |
50 / 40 km/h |
12 मीटर (12 से 18) |
डिज़ाइन स्पीड वह रफ़्तार है जिसके हिसाब से सड़क के मोड़, चढ़ाई और चौड़ाई बनाई जाती है। सामान्य वाली स्पीड से ही सड़क बननी चाहिए। कम से कम वाली स्पीड सिर्फ वहाँ चलती है जहाँ ज़मीन कम हो या खर्च बहुत बढ़ जाए। ज़मीन की चौड़ाई वह पूरी पट्टी है जो सड़क के नाम ली जाती है, इसलिए वह गाड़ी चलने वाली पक्की सतह से हमेशा कई गुना चौड़ी होती है।
फर्क सीधा है। एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग दूर तक तेज़ी से पहुँचाने के लिए हैं, उन पर रास्ते कम खुलते हैं। अन्य जिला सड़क और गाँव की सड़क हर खेत और हर गाँव तक पहुँचने के लिए हैं, चाहे रफ़्तार कम रहे। राज्य राजमार्ग और मुख्य जिला सड़क दोनों काम थोड़ा-थोड़ा करती हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग में क्या फर्क है?
फर्क इसमें है कि सड़क किसे जोड़ती है और उसे कौन बनवाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग देश की लंबाई-चौड़ाई में चलता है और हर एक का नंबर होता है। IRC:73-2023 का उदाहरण एनएच-16 है, जो चेन्नई से कोलकाता के पास डानकुनी तक 1,711 किलोमीटर जाता है। यह केंद्र सरकार की सड़क है।
राज्य राजमार्ग एक राज्य के अंदर जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों को जोड़कर ट्रैफिक को राष्ट्रीय राजमार्ग तक ले जाता है। कोड का उदाहरण पश्चिम बंगाल का एसएच-1 है, जो बनगाँव से कुलपी तक करीब 151 किलोमीटर है। इसे राज्य सरकार बनवाती है, अक्सर अपने लोक निर्माण विभाग से।
नाप-जोख में दोनों बराबर हैं। दो लेन के एनएच और दो लेन के एसएच की डिज़ाइन स्पीड एक है, और जितनी लेन, उतनी ज़मीन, चाहे सड़क किसी की भी हो।
एक्सप्रेसवे क्या होता है?
एक्सप्रेसवे वह राजमार्ग है जिस पर गाड़ी सिर्फ इंटरचेंज से चढ़ती और उतरती है। दोनों तरफ का ट्रैफिक डिवाइडर से अलग रहता है और चौराहे की जगह फ्लाईओवर या अंडरपास होते हैं। पैदल चलने वाले, दोपहिया, तिपहिया, बैलगाड़ी और ट्रैक्टर इस पर नहीं चल सकते।
इसकी हर लेन 3.75 मीटर चौड़ी होती है, जबकि आम हाईवे की 3.5 मीटर। कोड कहता है कि एक्सप्रेसवे शुरू से छह लेन के हिसाब से प्लान हो। इसके पूरे नियम एक अलग कोड IRC:SP:99 में हैं।
जिला सड़क और गाँव की सड़क क्या होती है?
गाँव का आदमी रोज़ इन्हीं सड़कों पर चलता है। मुख्य जिला सड़क जिले के अंदर की बड़ी सड़क है, जो पैदावार वाले इलाकों को मंडी और राजमार्ग से जोड़ती है। अन्य जिला सड़क गाँव के इलाके को मंडी, तहसील या ब्लॉक मुख्यालय तक निकलने का रास्ता देती है। गाँव की सड़क एक गाँव को दूसरे गाँव से और पास की बड़ी सड़क से जोड़ती है।
अन्य जिला सड़क और गाँव की सड़क मिलकर ग्रामीण सड़क कहलाती हैं, और इनके नियम IRC:SP:20 में हैं:
- पक्की पट्टी (कैरिजवे), जिस पर गाड़ी चलती है, एक लेन की 3.75 मीटर होती है। जहाँ रोज़ 100 से कम मोटर गाड़ियाँ चलें और आगे बढ़ने की उम्मीद न हो, वहाँ 3 मीटर भी रखी जा सकती है।
- दोनों तरफ के कंधे (शोल्डर) मिलाकर पूरी सड़क मैदान में 7.5 मीटर और पहाड़ में 6 मीटर चौड़ी होती है।
एक बात ठेकेदार और पंचायत दोनों के काम की है। गाँव की सड़क अभी एक लेन की बने, तब भी ज़मीन आगे की दो लेन वाली सड़क के हिसाब से ली जानी चाहिए, ताकि बाद में चौड़ा करते समय किनारे बने घर-दुकान न तोड़ने पड़ें। ज़्यादातर नई गाँव की सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनती हैं, जो साल 2000 में शुरू हुई थी।
बनावट के हिसाब से सड़क कितने प्रकार की होती है?
काम से पता चलता है कि सड़क किसके लिए है। बनावट से पता चलता है कि वह किस चीज़ से बनी है। IRC:73-2023 सड़कों को इन आधारों पर भी बाँटता है:
- सतह के माल से: कच्ची मिट्टी की सड़क, बजरी या मुरम की सड़क, डब्ल्यूबीएम (पानी डालकर दबाई गई गिट्टी), डामर की सड़क और सीमेंट कंक्रीट यानी सीसी रोड।
- वज़न सहने के तरीके से: लचीली सड़क, जिसमें डामर की परतें पहिए का वज़न नीचे तक बाँटती हैं; सख़्त सड़क, जिसमें कंक्रीट का स्लैब खुद वज़न फैलाता है; और बीच वाली, जिसमें सीमेंट मिली परत के ऊपर डामर होता है।
- सतह से: पक्की या कच्ची।
- ट्रैफिक से: हल्के, मध्यम या भारी ट्रैफिक वाली।
राष्ट्रीय राजमार्ग भी डामर का हो सकता है और गाँव की सड़क भी। फर्क परतों की मोटाई और मज़बूती में होता है, जो सड़क की परतें वाली अंग्रेज़ी गाइड में नीचे से ऊपर तक समझाया गया है। कंक्रीट वाली सड़क कैसे बनती है, यह सीसी रोड कैसे बनाते हैं में है।
ज़मीन की ढलान से सड़क का प्रकार कैसे बदलता है?
एक ही प्रकार की सड़क मैदान और पहाड़ में अलग तरह से बनती है। कोड ज़मीन को उसकी आड़ी ढलान से चार हिस्सों में बाँटता है:
ज़मीन के प्रकार और दो लेन के राजमार्ग की डिज़ाइन स्पीड (IRC:73-2023, टेबल 3.1 और 3.2)
| ज़मीन |
आड़ी ढलान |
दो लेन एनएच/एसएच (सामान्य / कम से कम) |
गाँव की सड़क (सामान्य / कम से कम) |
| मैदानी |
10 प्रतिशत से कम |
100 / 80 km/h |
50 / 40 km/h |
| उतार-चढ़ाव वाली |
10 से 25 प्रतिशत |
100 / 80 km/h |
50 / 40 km/h |
| पहाड़ी |
25 से 60 प्रतिशत |
50 / 40 km/h |
30 / 20 km/h |
| खड़ी ढलान |
60 प्रतिशत से ज़्यादा |
40 / 30 km/h |
30 / 20 km/h |
पहाड़ में कोड हर प्रकार की सड़क के लिए कम से कम दो लेन, यानी 7 मीटर की पक्की पट्टी, की सलाह देता है, क्योंकि वहाँ सड़क के किनारे बस्ती तेज़ी से बसती है और बाद में चौड़ा करना मुश्किल होता है।
कौन सी सड़क कितनी चौड़ी होती है?
चौड़ाई सड़क के नाम से नहीं, लेन से तय होती है। इसलिए एक ही नियम गाँव से राजमार्ग तक चलता है:
- एक लेन की सड़क (ज़्यादातर गाँव और अन्य जिला सड़कें): 3.75 मीटर।
- बीच की चौड़ाई: 5.5 मीटर, जो बड़े ट्रंक रूट छोड़कर दो लेन की जगह बन सकती है।
- दो लेन का राजमार्ग: 7 मीटर, यानी 3.5 मीटर की दो लेन।
- चार, छह या आठ लेन का राजमार्ग: हर लेन 3.5 मीटर, और बीच का डिवाइडर कम से कम 1.5 मीटर।
- एक्सप्रेसवे: हर लेन 3.75 मीटर।
किस सड़क पर कौन सी मशीन लगती है?
सड़क का प्रकार जितना बड़ा, मशीनों का बेड़ा उतना बड़ा। चार लेन के राजमार्ग पर मिट्टी का काम एक्सकेवेटर करते हैं, हर परत को Mahindra Roadmaster G90 जैसे मोटर ग्रेडर से बराबर किया जाता है और L&T 1190 जैसे सिंगल ड्रम सॉयल कॉम्पैक्टर से दबाया जाता है। ग्रेडर का काम ग्रेडर मशीन क्या है में और रोलर के साइज़ और कीमत रोड रोलर की कीमत वाले पेज पर हैं।
गाँव की सड़क छोटा काम है। वहाँ अक्सर एक बैकहो लोडर, जैसे JCB 3DX, किनारे की नाली खोदता है, टिपर भरता है और मुरम-गिट्टी फैलाता है, और रोलर किराये पर आ जाता है। छोटे ठेकेदार के लिए यहीं से शुरुआत आसान है, क्योंकि ग्रामीण सड़क के सारे नियम एक ही किताब में हैं।
यही गाइड अंग्रेज़ी में types of roads in India नाम से है। पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें। दोनों कोड का मूल पाठ यहाँ है: IRC:73-2023 का मूल पाठ और IRC:SP:20 ग्रामीण सड़क मैनुअल।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में सड़कों के प्रकार किस योजना से तय हुए?
पहले पाँच प्रकार, यानी राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, मुख्य जिला सड़क, अन्य जिला सड़क और गाँव की सड़क, नागपुर रोड प्लान से आए। बाद में एक्सप्रेसवे जुड़ा और तीसरी 20 साला योजना ने इन्हें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक प्रणाली में रखा।
गाँव की सड़क कितनी चौड़ी होती है?
गाँव की सड़क की पक्की पट्टी आम तौर पर 3.75 मीटर की एक लेन होती है, और कंधे मिलाकर मैदान में पूरी सड़क 7.5 मीटर। बहुत कम ट्रैफिक वाली जगह पक्की पट्टी 3 मीटर भी रखी जा सकती है।
क्या एक्सप्रेसवे पर ट्रैक्टर चला सकते हैं?
नहीं। IRC:73-2023 के हिसाब से एक्सप्रेसवे पर पैदल, दोपहिया, तिपहिया, बैलगाड़ी और ट्रैक्टर नहीं चल सकते, सिर्फ तेज़ चलने वाली गाड़ियाँ। ट्रैक्टर-ट्रॉली को आम राजमार्ग या जिला सड़कों से ही जाना होता है।
पक्की और कच्ची सड़क में क्या फर्क है?
पक्की सड़क की ऊपरी सतह डामर या सीमेंट कंक्रीट की होती है जो बारिश में भी टिकती है। कच्ची सड़क मिट्टी, बजरी या मुरम की होती है, जो पानी लगने पर बैठ जाती है और हर मौसम में नहीं चलती।
मुख्य जिला सड़क और अन्य जिला सड़क में क्या फर्क है?
मुख्य जिला सड़क जिले की बड़ी सड़क है, जो मंडियों को राजमार्ग से जोड़ती है और मैदान में 80 km/h के लिए बनती है। अन्य जिला सड़क ग्रामीण सड़क है, जो गाँव के इलाके को तहसील या ब्लॉक तक ले जाती है और 50 km/h के लिए बनती है।
आगे क्या देखें
किसी सड़क का ठेका देखने से पहले उसका प्रकार और ज़मीन की ढलान पढ़ लीजिए। चौड़ाई, रफ़्तार और लगने वाली मशीनें, तीनों इन्हीं दो बातों से तय होती हैं।
यहाँ दिए गए नाप IRC:73-2023 और IRC:SP:20 से लिए गए हैं और सांकेतिक हैं। कोड बदलते रहते हैं और ठेके में लिखा संस्करण ही मान्य होता है, इसलिए काम शुरू करने या मशीन खरीदने से पहले अपने इंजीनियर, विभाग या अधिकृत डीलर से एक बार पक्का कर लें। प्रकाशन के बाद बदली जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।