ये सारे नाप इंडियन रोड्स कांग्रेस की गाइडलाइन IRC:SP:62-2014 से हैं, जो उन सड़कों के लिए है जिन पर रोज़ 450 से कम भारी गाड़ियाँ चलती हैं। हाईवे का कंक्रीट स्लैब अलग कोड से बनता है।
सीसी रोड क्या होता है?
सीसी का मतलब है सीमेंट कंक्रीट। सीसी रोड की ऊपरी सतह कंक्रीट का एक सख़्त स्लैब होती है, जिसे पैनल में बाँटकर बीच में जॉइंट काटे जाते हैं। इंजीनियर इसे रिजिड पेवमेंट यानी सख़्त सड़क कहते हैं, और काली डामर वाली सड़क को लचीली सड़क।
डामर रोड पहिए का वज़न परत-दर-परत नीचे की मिट्टी तक पहुँचाती है, इसलिए कमज़ोर मिट्टी ऊपर गड्ढे के रूप में दिखती है। कंक्रीट का स्लैब कमज़ोर जगह के ऊपर पुल की तरह टिका रहता है और वज़न बड़े हिस्से पर बाँट देता है। इसीलिए जहाँ पानी भरता है या नाली ठीक नहीं है, वहाँ पंचायतें सीसी रोड चुनती हैं। डामर खड़े पानी में टिकता नहीं। कंक्रीट टिक जाता है। बाकी प्रकार सड़कों के प्रकार वाली अंग्रेज़ी गाइड में हैं। हिंदी में सड़क कितने प्रकार की होती है वाला पेज देखें।
सीसी रोड बनाने की विधि क्या है?
काम इसी क्रम में होता है:
- नीचे की प्राकृतिक ज़मीन (सबग्रेड) दबाकर समतल की जाती है। उसका CBR कम से कम 4 होना चाहिए। CBR लैब की जाँच है जो बताती है कि मिट्टी दबाव कितना सहती है।
- उस पर सब-बेस बिछता है: पहले 100 mm (10 सेमी) की दानेदार परत, जिसमें बजरी, मुरम या नदी की बजरी हो, फिर 75 mm (7.5 सेमी) की WBM ग्रेड III या WMM, यानी दबाई हुई गिट्टी।
- दोनों किनारों पर लोहे के चैनल के फर्मे लगते हैं, जिनकी ऊँचाई स्लैब जितनी हो और हर टुकड़ा कम से कम 3 मीटर लंबा हो।
- सीमेंट, रेत, गिट्टी और पानी वज़न से तौलकर मिलाए जाते हैं, अंदाज़े से नहीं। मिक्सर कम से कम 0.3 घन मीटर का हो, और बिछाने की रफ़्तार से 25 प्रतिशत ज़्यादा माल बनाए ताकि काम न रुके।
- कंक्रीट फावड़े से फैलाया जाता है, फर्मों के पास नीडल वाइब्रेटर चलता है और फिर फर्मों पर टिकी वाइब्रेटिंग स्क्रीड (हिलने वाली पट्टी) आगे खींची जाती है।
- कैनवास की बेल्ट से सतह बराबर होती है, फिर झाड़ू से सड़क के आड़े धारियाँ बनती हैं ताकि टायर फिसले नहीं। धारी 1.5 mm से गहरी नहीं होती।
- कंक्रीट थोड़ा सख़्त होते ही कटर मशीन से 3 से 5 mm चौड़े जॉइंट काटे जाते हैं।
- सतह पर क्योरिंग कंपाउंड छिड़ककर गीली बोरी या जूट की चटाई ढकी जाती है, फिर 14 दिन तराई होती है।
- 14 दिन बाद खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली और हल्की गाड़ियाँ चल सकती हैं, माल भरी भारी गाड़ियाँ 28 दिन बाद।
सबसे ज़्यादा टूटने वाली शर्त समय की है। किसी हिस्से में पहला मसाला मिलने से फिनिश तक 90 मिनट से ज़्यादा नहीं लगने चाहिए, जब कंक्रीट 25 से 30°C का हो, और ठंडे कंक्रीट में भी 2 घंटे से ज़्यादा नहीं। कंक्रीट 30°C से ज़्यादा गरम हो तो काम रुकता है, इसलिए गर्मी में गाइडलाइन रात की ढलाई की इजाज़त देती है।
सीसी रोड की मोटाई कितनी होती है?
मोटाई इससे तय होती है कि रोज़ कितनी भारी गाड़ियाँ चलेंगी। भारी गाड़ी यानी 3 टन (30 kN) से ज़्यादा लदी गाड़ी, जैसे भरा ट्रक, बस या माल वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली।
सीसी रोड के स्लैब की मोटाई, IRC:SP:62-2014 (कमज़ोर मिट्टी, CBR 4, नीचे 75 mm WBM और 100 mm दानेदार परत)
| रोज़ की भारी गाड़ियाँ |
जॉइंट की दूरी |
स्लैब की मोटाई |
| 50 तक |
2.5, 3.25 या 4 मीटर |
160 mm (16 सेमी) |
| 50 से 150 |
2.5 मीटर |
160 mm (16 सेमी) |
| 50 से 150 |
3.25 मीटर |
170 mm (17 सेमी) |
| 50 से 150 |
4 मीटर |
180 mm (18 सेमी), एक तापमान क्षेत्र में 190 mm |
| 150 से 450 |
डिज़ाइन से |
इंजीनियर की थकान वाली गणना से तय, अंदाज़े से नहीं |
मिट्टी अच्छी हो तब भी स्लैब 150 mm से पतला नहीं बनता, यह कोड की निचली सीमा है। डिज़ाइन का पहिया भार 50 kN है, यानी जुड़वाँ पहियों पर करीब 5 टन (5,000 kg)। रोज़ खदान के टिपर या गन्ने से भरी ट्रॉलियाँ चलनी हों, तो अलग डिज़ाइन बनवाइए।
सीसी रोड में कौन सा कंक्रीट लगता है?
कम से कम M30, यानी 28 दिन बाद 30 MPa की दबाने वाली ताकत। सड़क के लिए उससे ज़रूरी है मुड़ने की ताकत (फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ), जो कम से कम 3.8 MPa हो, क्योंकि पहिए के नीचे स्लैब प्लेट की तरह मुड़ता है। M30 डिज़ाइन मिक्स है, इसका कोई तय तसला-बोरी वाला अनुपात नहीं होता। हर 100 घन मीटर या हर दिन के काम पर छह बीम और छह क्यूब भरे जाते हैं, आधे 7 दिन की जाँच के लिए और आधे 28 दिन की।
सीसी रोड में जॉइंट क्यों काटते हैं?
कंक्रीट सूखते समय सिकुड़ता है और धूप-ठंड में फैलता-सिकुड़ता है। लंबा स्लैब बिना जॉइंट छोड़ दें तो वह कहीं भी टेढ़ा-मेढ़ा फट जाएगा। जॉइंट पहले से तय की गई सीधी दरार है।
- सिकुड़न वाला जॉइंट हर 2.5 से 4 मीटर पर, स्लैब की मोटाई के एक-चौथाई से एक-तिहाई गहरा, 24 घंटे के अंदर कटता है। गाँव की सड़क में यहाँ डॉवेल बार नहीं लगते, कटे हिस्से के नीचे पत्थरों की पकड़ ही वज़न आगे पहुँचाती है।
- फैलाव वाला जॉइंट पुल और पुलिया के पास, 20 mm चौड़ा। यहाँ 25 mm मोटे, 450 mm लंबे सादे सरिये (डॉवेल बार) 250 mm की दूरी पर लगते हैं।
- निर्माण जॉइंट वहाँ बनता है जहाँ दिन का काम खत्म हुआ या ढलाई 90 मिनट से ज़्यादा रुकी।
कटे जॉइंट में गरम रबर मिला बिटुमेन भरा जाता है ताकि पानी अंदर न जाए। ढलाई से पहले 3 से 5 mm की प्लास्टिक पट्टी रख दी जाए तो वह स्लैब में ही रहती है और भराई नहीं लगती। हाईवे के जॉइंट की बात डॉवेल बार और टाई बार वाली अंग्रेज़ी गाइड में है।
सीसी रोड बनाने वाली मशीन कौन सी है?
अक्सर पूरा कंक्रीट का काम एक सेल्फ लोडिंग कंक्रीट मिक्सर करता है, जो खुद गिट्टी-रेत उठाता है, तौलता है, मिलाता है और ढलाई तक ले जाता है। Universal SLM-2 का ड्रम 3.2 m³ का है और Conmat CSLM 2800 का 2.8 m³। कंक्रीट प्लांट से आए तो ट्रांजिट मिक्सर लगता है, देखें कंक्रीट मिक्सर मशीन।
मिट्टी और गिट्टी की परतें सिंगल ड्रम सॉयल कॉम्पैक्टर से दबती हैं, जैसे 11,150 kg का L&T 1190D। हर साइज़ की कीमत रोड रोलर की कीमत वाले पेज पर है। साथ में नीडल वाइब्रेटर, वाइब्रेटिंग स्क्रीड और जॉइंट कटर चाहिए। हाईवे वाली स्लिपफॉर्म पेवर मशीन गाँव की सड़क में आम तौर पर नहीं आती।
यही गाइड अंग्रेज़ी में CC road construction नाम से है। पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें।
सीसी रोड में दरार क्यों आती है?
नई सीसी रोड में दरार ज़्यादातर बनाते समय की गलती से आती है। गाइडलाइन के गिनाए कारण हैं: गर्मी में सतह का पानी जल्दी उड़ना, सूखते समय सिकुड़न, तेज़ हवा और कम नमी, बहुत ज़्यादा तापमान, जॉइंट देर से काटना और नीचे की परत का ऊबड़-खाबड़ होना। गर्मी में जॉइंट 6 से 7 घंटे में ही काटने पड़ सकते हैं, और ढलाई के बाद पानी की बारीक फुहार या गीली बोरी दरार से बचाती है।
पूरी मोटाई तक गई दरार वाला पैनल पास नहीं होता। किसी पैनल में एक दरार 750 mm से लंबी नहीं होनी चाहिए, भले वह आधी मोटाई से कम गहरी हो। सतह 3 मीटर की सीधी पट्टी से जाँची जाती है और नीचे 8 mm से ज़्यादा गैप नहीं होना चाहिए। पूरा कोड IRC:SP:62-2014 के मूल पाठ में पढ़ा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सीसी रोड का फुल फॉर्म क्या है?
सीसी रोड का फुल फॉर्म सीमेंट कंक्रीट रोड है। इसकी ऊपरी परत सीमेंट, रेत, गिट्टी और पानी से बने कंक्रीट का स्लैब होती है, डामर की नहीं।
सीसी रोड कितने दिन में चालू होती है?
ढलाई के 14 दिन बाद खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली और हल्की गाड़ियाँ चल सकती हैं। निर्माण का माल लेकर चलने वाली भारी गाड़ियाँ 28 दिन तक नहीं जानी चाहिए, तब तक बैरिकेड लगे रहते हैं।
सीसी रोड पर कितने दिन पानी डालना चाहिए?
पहले 24 घंटे कंपाउंड के ऊपर गीली बोरी ढकी रहती है। फिर 14 दिन तक मिट्टी की छोटी मेड़ बनाकर पानी रोका जाता है या बोरी गीली रखी जाती है। जल्दी सूखा कंक्रीट पूरी ताकत नहीं पकड़ता।
क्या सीसी रोड में सरिया डालते हैं?
गाँव की सादी जॉइंट वाली सीसी रोड में सरिये का जाल नहीं लगता, कोड इसे ज़रूरी नहीं मानता। सरिया सिर्फ पुल-पुलिया के पास फैलाव वाले जॉइंट पर डॉवेल बार के रूप में लगता है।
फर्मे कितने घंटे बाद खोल सकते हैं?
कंक्रीट डालने के कम से कम 12 घंटे बाद, ध्यान से ताकि किनारा न टूटे। फर्मे हटने के बाद स्लैब के किनारों पर बराबर ऊँचाई तक मिट्टी चढ़ा दी जाती है।
आगे क्या देखें
सड़क बनवाने से पहले यह गिन लीजिए कि उस पर रोज़ कितनी भरी गाड़ियाँ चलेंगी। मोटाई, जॉइंट की दूरी और नीचे की परत, तीनों इसी एक गिनती से तय होते हैं।
यहाँ दिए गए नाप और स्पेसिफिकेशन सांकेतिक हैं। ये ठेके की स्पेसिफिकेशन, मिट्टी, जगह और तारीख के हिसाब से बदल सकते हैं, इसलिए काम शुरू करने या मशीन खरीदने से पहले अपने इंजीनियर, कंपनी या अधिकृत डीलर से एक बार पक्का कर लें। प्रकाशन के बाद बदली जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।