हमारी लिस्ट में अभी 41 डोजर हैं, 9 टन की छोटी मशीन से लेकर 108 टन की खदान वाली मशीन तक। इस पेज के सारे नंबर इन्हीं मॉडलों की लिस्टेड स्पेसिफिकेशन से लिए गए हैं (नवंबर 2026)।
बुलडोजर क्या होता है और इसमें क्या-क्या लगा होता है?
मशीनों के प्रकार तय करने वाला मानक IS/ISO 6165:2006 डोजर को ऐसी चेन या पहिये वाली मशीन बताता है जिसका ब्लेड मशीन के आगे बढ़ने के साथ माल को काटता, खिसकाता और बराबर करता है। मतलब ताकत ब्लेड के हिलने से नहीं आती। पूरी मशीन का वजन और इंजन मिलकर ब्लेड को आगे धकेलते हैं।
सबसे आगे ब्लेड होता है, मोटी स्टील की प्लेट जिसकी नीचे वाली धार ज़मीन में घुसती है। हाइड्रोलिक सिलेंडर इसे ऊपर-नीचे और तिरछा करते हैं। नीचे दो चेन होती हैं, जिन पर स्टील की प्लेटें (शू) जुड़ी रहती हैं, और इनके साथ रोलर और आगे-पीछे के पहिये। इस पूरे ढाँचे को अंडरकैरिज कहते हैं, और यही मशीन का वजन ज़मीन पर फैलाता है।
बीच में डीजल इंजन और ट्रांसमिशन है, जो ताकत चेन तक पहुँचाता है। ऊपर केबिन में ऑपरेटर बैठता है। पीछे कई मशीनों में रिपर लगता है, एक या तीन दाँत वाला कांटा, जो ज़्यादातर मॉडलों में अलग से लगवाना पड़ता है।
बुलडोजर का काम क्या है?
जहाँ बहुत सारी मिट्टी या पत्थर को थोड़ी दूर तक खिसकाना हो, वहाँ बुलडोजर सबसे काम की मशीन है। भारत में इसके आम काम ये हैं:
- झाड़ी, पेड़ों की जड़ों या पुराने ढाँचे वाली ज़मीन को साफ़ करना।
- सड़क और रेल लाइन के लिए ज़मीन की कटाई और भराई। इसके बाद ग्रेडर ऊपर की सतह की फिनिशिंग करता है।
- बाँध, नहर और बड़े तालाब के किनारों पर मिट्टी चढ़ाना और फैलाना।
- कोयला और पत्थर की खदानों में ऊपर की मिट्टी हटाना, डंपर से उतरा माल फैलाना और कोयले का ढेर संभालना।
- रिपर से कड़ी मुरम या नरम चट्टान तोड़ना, ताकि बाद की खुदाई आसान हो।
दूरी का ध्यान रखें। डोजर पास के काम में सबसे अच्छा है। माल को दूर ले जाना हो तो लोडर और डंपर की जोड़ी बेहतर रहती है।
बुलडोजर कैसे चलता है?
बुलडोजर का हर चक्कर दो हिस्सों में होता है। आगे जाते समय ब्लेड नीचे रहता है और माल धकेलता है। वापस आते समय ब्लेड ऊपर उठा रहता है और मशीन खाली लौटती है। अच्छा ऑपरेटर इस खाली वापसी का समय जितना हो सके कम रखता है।
चेन वाले डोजर में स्टीयरिंग व्हील नहीं होता। मुड़ने के लिए एक तरफ की चेन धीमी या बंद की जाती है और दूसरी चलती रहती है। पुराने ढंग के डोजर में हर चेन का अपना क्लच और ब्रेक होता है; BEML BD50 में ये हाथ के लीवर से चलते हैं।
हाइड्रोस्टैटिक डोजर में हर चेन की अपनी हाइड्रोलिक मोटर होती है, इसलिए मुड़ते समय भी दोनों चेन को ताकत मिलती रहती है, और कई मॉडल दोनों चेन उल्टी दिशा में चलाकर अपनी ही जगह पर घूम जाते हैं। हमारी लिस्ट के 37 चेन वाले डोजर में से 13 ऐसे हैं। Komatsu D39EX-22 इन्हीं में से है और एक जॉयस्टिक से चलता है।
चेन वाला डोजर धीमा होता है। लिस्ट के मॉडलों की सबसे ऊँची रफ़्तार 8 से 12.7 km/h है, इसलिए इसे एक साइट से दूसरी साइट ट्रेलर पर ले जाते हैं। टायर वाले डोजर 30.5 से 38.5 km/h तक चल लेते हैं।
चेन का असली फायदा यह है कि मशीन का भार बड़े हिस्से पर फैल जाता है। एक ही इंजन वाले दो Komatsu मॉडल देखें। D39EX-22 की 460 mm चौड़ी शू ज़मीन पर 40.8 kPa दबाव डालती है, जबकि Komatsu D39PX-22 की 635 mm चौड़ी शू सिर्फ 31.0 kPa। चौड़ी शू वाला डोजर गीली और नरम मिट्टी में कम धँसता है।
बुलडोजर के ब्लेड कितने प्रकार के होते हैं?
ब्लेड से तय होता है कि डोजर एक बार में कितना माल धकेलेगा और कितनी बारीकी से काम करेगा। आम प्रकार ये हैं:
- स्ट्रेट ब्लेड (S): सीधा और छोटा ब्लेड। कड़ी मिट्टी में अच्छा घुसता है और ज़मीन बराबर करने में सही रहता है।
- यू ब्लेड (U): दोनों किनारे आगे की ओर मुड़े होते हैं, ताकि माल बगल से न गिरे। हल्का, ढीला माल ज़्यादा मात्रा में ले जाने के लिए।
- सेमी-यू ब्लेड (SU): इन दोनों के बीच का, किनारे थोड़े मुड़े हुए। हमारी लिस्ट के 37 चेन वाले डोजर में से 17 में यही स्टैंडर्ड आता है।
- एंगल ब्लेड: इसे बाएँ या दाएँ तिरछा कर सकते हैं, जिससे माल एक तरफ निकलता जाता है। गड्ढे भरने और किनारे पर मिट्टी डालने में काम आता है।
- PAT ब्लेड: छोटे डोजर में आम। ऑपरेटर इसे केबिन से उठा सकता है, तिरछा कर सकता है और कोण पर घुमा सकता है, इसलिए इसे छह तरफ चलने वाला ब्लेड भी कहते हैं।
- कोयला ब्लेड: बहुत बड़ा और ऊँचा ब्लेड, कोयले जैसे हल्के माल के लिए।
ब्लेड बदलने से एक ही मशीन की क्षमता कितनी बदलती है, यह SEM 822D में दिखता है। इसका स्टैंडर्ड सेमी-यू ब्लेड 6.4 m³ का है, यू ब्लेड 7.5 m³ का और कोयला ब्लेड 9.2 m³ का।
बुलडोजर कितने प्रकार के होते हैं और कितने टन का होता है?
चलने के हिसाब से डोजर दो तरह के होते हैं: चेन वाले, जिन्हें क्रॉलर डोजर कहते हैं, और टायर वाले, जिन्हें व्हील डोजर कहते हैं। हमारी लिस्ट के 41 में से 37 चेन वाले हैं। आकार के हिसाब से इन्हें ऐसे बाँटा जाता है:
| वर्ग |
लिस्ट में मॉडल |
वजन (kg) |
इंजन (HP) |
कहाँ काम आता है |
| छोटा डोजर |
6 |
9,040 से 13,700 |
90 से 134 |
खेत की ज़मीन, गाँव की सड़क, तंग साइट |
| कंस्ट्रक्शन डोजर |
19 |
16,032 से 24,540 |
146 से 265 |
सड़क, बाँध, बड़ी साइट की कटाई और भराई |
| खदान वाला डोजर |
12 |
35,830 से 108,390 |
320 से 890 |
कोयला और पत्थर की बड़ी खदानें |
| टायर वाला डोजर |
4 |
21,950 से 48,090 |
248 से 527 |
पक्की ज़मीन, जहाँ मशीन को जल्दी जगह बदलनी हो |
नीचे हर चेन वाले वर्ग के कुछ मॉडल हैं:
| मॉडल |
वर्ग |
वजन (kg) |
इंजन (HP) |
स्टैंडर्ड ब्लेड |
ब्लेड क्षमता |
| Komatsu D39EX-22 |
छोटा |
9,040 |
105 |
PAT |
2.21 m³ |
| BEML BD50 |
छोटा |
12,170 |
90 |
एंगल |
1.76 m³ |
| Cat D5R2 |
कंस्ट्रक्शन |
16,032 |
174 |
PAT |
3.31 m³ |
| SEM 822D |
कंस्ट्रक्शन |
24,000 |
235 |
सेमी-यू |
6.4 m³ |
| Komatsu D155A-6 |
खदान |
41,700 |
360 |
सेमी-यू |
9.4 m³ |
| BEML BD475-2 |
खदान |
100,000 |
850 |
सेमी-यू |
25.6 m³ |
आम ठेकेदार के लिए असली चुनाव 16 से 25 टन के कंस्ट्रक्शन डोजर में होता है, और लिस्ट के सबसे ज़्यादा मॉडल भी इसी वर्ग के हैं। 35 टन से ऊपर की मशीनें बड़ी खदानों के लिए बनी हैं। उन्हें चलाने, ढोने और उनकी सर्विस का खर्च बिल्कुल अलग स्तर का होता है।
रिपर क्या होता है?
रिपर डोजर के पीछे लगा मोटा स्टील का दाँत है। डोजर इसे ज़मीन में गाड़कर आगे चलता है और कड़ी मुरम, जमी हुई मिट्टी या नरम चट्टान में दरारें डाल देता है। फिर ब्लेड उस टूटे माल को आसानी से धकेल लेता है।
छोटे और मझले डोजर में आम तौर पर तीन दाँत वाला रिपर आता है। Cat D5R2 का रिपर ज़मीन में 475 mm तक घुसता है। खदान वाले बड़े डोजर में एक भारी दाँत वाला रिपर होता है, जो BEML BD475-2 में 1,800 mm तक गहराई पकड़ता है। हर मॉडल में रिपर का विकल्प नहीं होता। Komatsu D39PX-22 में रिपर लगता ही नहीं।
ब्लेड की धार, रिपर के दाँत और चेन के हिस्से समय के साथ घिसते हैं। इनकी पूरी जानकारी बुलडोजर के पार्ट्स वाले पेज पर है।
बुलडोजर और जेसीबी में क्या अंतर है?
गाँव में लोग हर पीली मशीन को जेसीबी कह देते हैं, पर बुलडोजर और जेसीबी बैकहो लोडर का काम अलग है। जेसीबी खोदती है, मिट्टी उठाती है, ट्रॉली में भरती है और टायरों पर सड़क से खुद अगले गाँव पहुँच जाती है। बुलडोजर न गड्ढा खोदता है, न माल उठाता है। वह भारी मात्रा में मिट्टी धकेलता है, और यही काम वह जेसीबी से कहीं ज़्यादा ताकत से करता है।
| बात |
बुलडोजर |
जेसीबी (बैकहो लोडर) |
ग्रेडर |
| मुख्य काम |
धकेलना, काटना, मोटी भराई |
खोदना और लोड करना |
सतह बराबर करना और ढलान देना |
| किस पर चलता है |
ज़्यादातर चेन पर |
टायरों पर |
टायरों पर |
| साइट तक कैसे पहुँचता है |
ट्रेलर पर (चेन वाला) |
खुद सड़क पर चलकर |
खुद सड़क पर चलकर |
| सबसे अच्छा कहाँ |
खदान, बाँध, ज़मीन की सफ़ाई |
गाँव और शहर की खुदाई |
सड़क की फिनिशिंग |
सड़क के काम में बुलडोजर के बाद अक्सर ग्रेडर मशीन आती है। दोनों का पूरा मुकाबला ग्रेडर और बुलडोजर में फर्क वाले पेज पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बुलडोजर को क्या कहते हैं?
इसे डोजर या क्रॉलर डोजर भी कहते हैं। टायरों पर चलने वाले डोजर को व्हील डोजर कहा जाता है। काम सबका एक है: ब्लेड से माल धकेलना।
बुलडोजर कैसे चलता है?
चेन वाला डोजर एक तरफ की चेन धीमी करके मुड़ता है। पुराने मॉडल में यह हर चेन के क्लच और ब्रेक से होता है, नए हाइड्रोस्टैटिक मॉडल में हर चेन की अपनी मोटर होती है और मशीन जॉयस्टिक से चलती है।
बुलडोजर कितने टन का होता है?
हमारी लिस्ट के डोजर 9 टन से 108 टन तक के हैं। आम कंस्ट्रक्शन डोजर 16 से 25 टन के होते हैं, और 35 टन से भारी मशीनें खदानों में चलती हैं।
बुलडोजर की कीमत क्या है?
कीमत वर्ग, इंजन और ब्लेड पर निर्भर है, और खदान वाले कई बड़े मॉडल की कीमत पूछने पर ही बताई जाती है। हर मॉडल की ताज़ा कीमत बुलडोजर की कीमत वाले पेज पर देखें।
बुलडोजर और जेसीबी में अंतर क्या है?
जेसीबी खोदती है और माल लोड करती है, और सड़क पर खुद चल लेती है। बुलडोजर सिर्फ धकेलता और काटता है, ज़्यादातर चेन पर चलता है और ट्रेलर पर साइट तक जाता है।
आगे क्या देखें
डोजर के प्रकार, उपयोग और खरीदने से पहले की जाँच की पूरी जानकारी bulldozer वाले पेज पर है। पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें।
यहाँ दी गई स्पेसिफिकेशन और कीमत की जानकारी सांकेतिक है। ये वेरिएंट, जगह और तारीख के हिसाब से बदल सकते हैं, इसलिए खरीदने से पहले कंपनी या अधिकृत डीलर से एक बार पक्का कर लें। प्रकाशन के बाद बदली जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।