रोड रोलर का वजन कितना होता है?
यह रोलर के टाइप पर निर्भर करता है। नीचे की टेबल में 45 कंपैक्टर मॉडल का असली ऑपरेटिंग वेट रखा गया है, यानी मशीन का चलने लायक पूरा वजन, डीजल, पानी और ऑपरेटर के साथ। खाली ढांचे का वजन इससे कम होता है।
| रोलर का टाइप |
ऑपरेटिंग वेट |
किस काम के लिए |
| मिनी या बेबी रोलर (टैंडम) |
1,575–3,450 kg (1.6–3.5 टन) |
गली, फुटपाथ, पैच रिपेयर |
| टैंडम रोलर (डबल ड्रम) |
8,700–10,060 kg (8.7–10 टन) |
डामर की ऊपरी फिनिशिंग लेयर |
| सॉइल कंपैक्टर (सिंगल ड्रम) |
9,700–14,760 kg (9.7–14.8 टन) |
मिट्टी, GSB, WMM, बांध |
| भारी सॉइल कंपैक्टर |
22,000 kg (22 टन) |
बड़ा अर्थवर्क, माइनिंग |
| न्यूमैटिक टायर रोलर |
10,500–18,000 kg खाली वजन |
डामर की बीच वाली रोलिंग |
वजन देखने से पहले यह तय कर लें कि आपका काम मिट्टी का है या डामर का। हर टाइप की बनावट और रोड रोलर की कीमत अलग है।
कितने टन का रोलर किस काम के लिए?
मिट्टी दबानी है तो सिंगल ड्रम सॉइल कंपैक्टर चाहिए, और आम तौर पर 11 टन वाला। डामर की सड़क की फिनिशिंग करनी है तो 9 टन के आसपास का टैंडम रोलर चाहिए, जिसमें आगे-पीछे दोनों तरफ लोहे के ड्रम होते हैं। गली-मोहल्ले या फुटपाथ जैसे तंग काम के लिए 1.6 से 3.5 टन का मिनी रोलर काफी है।
एक गलती बहुत होती है। लोग मानते हैं कि ज़्यादा वजन हमेशा बेहतर कॉम्पैक्शन देगा। काम के हिसाब का वजन चुनना है, सबसे ज़्यादा वजन नहीं।
मिट्टी के लिए कितने टन का रोलर चाहिए?
मिट्टी, GSB और WMM जैसी लेयर के लिए सॉइल कंपैक्टर इस्तेमाल होता है। GSB का मतलब ग्रेन्युलर सब-बेस है, यानी सड़क के नीचे बिछने वाली गिट्टी की लेयर; WMM यानी वेट मिक्स मकैडम उसके ऊपर आती है। हर लेयर पहले ग्रेडर मशीन से बराबर फैलाई जाती है, फिर रोलर उसे दबाता है।
यहाँ कैटलॉग में एक बात साफ दिखती है। 21 सॉइल कंपैक्टर मॉडल में से 12 मॉडल 11,000 से 11,600 kg के बीच में हैं। यानी 11 टन की क्लास भारत में सॉइल कंपैक्टर की आम क्लास है, क्योंकि सरकारी सड़क के ठेकों में अक्सर इसी वजन की मशीन माँगी जाती है। JCB VM117 का ऑपरेटिंग वेट 11,525 kg है और यह इसी क्लास का उदाहरण है।
इससे ऊपर की मशीनें भी हैं। Dynapac CA405PS 14,760 kg का है और SANY SSR220C-8H 22,000 kg का, पर ये बड़े बांध, हाईवे के एम्बैंकमेंट या माइनिंग के लिए हैं। छोटे ठेकेदार के रोज़ के काम में इनकी ज़रूरत नहीं पड़ती।
टैंडम रोलर के वजन में बीच का साइज़ क्यों नहीं मिलता?
19 टैंडम रोलर मॉडल देखने पर दो साफ झुंड बनते हैं: एक 1,575 से 3,450 kg का, दूसरा 8,700 से 10,060 kg का। 3.5 टन और 8.7 टन के बीच एक भी मॉडल नहीं है।
वजह काम की है, कमी की नहीं। छोटा रोलर तंग जगह के लिए बना है और बड़ा रोलर पूरी चौड़ाई की डामर सड़क की फिनिशिंग के लिए। बीच का साइज़ दोनों काम ठीक से नहीं कर पाता। कोई “6 टन का टैंडम रोलर” बताए, तो मॉडल नंबर और स्पेसिफिकेशन शीट माँग कर जाँच लें।
छोटे काम के लिए Dynapac CC800 सबसे हल्का लिस्टेड मॉडल है, 1,575 kg का। Escorts EC 3664 3,300 kg का है और मिनी क्लास के ऊपरी सिरे पर बैठता है।
न्यूमैटिक टायर रोलर का वजन अलग क्यों गिना जाता है?
क्योंकि इसका वजन बदला जा सकता है। न्यूमैटिक रोलर में लोहे के ड्रम की जगह रबर के टायर होते हैं, और इसके डिब्बे में रेत, गिट्टी या पानी भरकर वजन बढ़ाया जाता है। इसे बैलास्ट कहते हैं।
इसलिए इसकी शीट पर दो नंबर मिलते हैं। SANY SPR260C-10 PRO खाली 18,000 kg का है और बैलास्ट भरने के बाद 26,000 kg तक जाता है। Dynapac CP275 खाली 14,000 kg का और भरने पर 30,000 kg तक। ठेके में माँगा गया वजन खाली का है या भरे हुए का, यह पढ़े बिना मशीन मत चुनें।
वजन के साथ दो और नंबर देख लें
सिर्फ कुल वजन पूरी बात नहीं बताता। ड्रम पर पड़ने वाला वजन अलग से देखें, क्योंकि सिंगल ड्रम मशीन में कुल वजन का बड़ा हिस्सा आगे के ड्रम पर आता है और कॉम्पैक्शन वहीं होता है। वाइब्रेशन वाली मशीन अपने वजन से ज़्यादा असर डालती है, इसलिए 11 टन की वाइब्रेटरी मशीन उतने ही वजन की बिना वाइब्रेशन वाली मशीन से गहरी लेयर दबा सकती है। वाइब्रेशन हाई या लो कब रखें और रोलिंग किनारे से कैसे शुरू करें, यह रोड रोलर कैसे चलाते हैं वाले पेज पर है।
ट्रांसपोर्ट का हिसाब भी वजन से जुड़ा है। 11 टन की मशीन ढोने के लिए सही ट्रेलर चाहिए और उसका किराया हर साइट बदलने पर लगेगा। छोटी सड़कों के काम में हल्की मशीन से दाम और ढुलाई दोनों बचते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रोड रोलर का वजन कितना होता है?
1,575 kg (1.6 टन) से 22,000 kg (22 टन) तक, टाइप के हिसाब से। मिनी रोलर 1.6 से 3.5 टन, टैंडम रोलर 8.7 से 10 टन, और सॉइल कंपैक्टर 9.7 से 14.8 टन के होते हैं।
रोड रोलर कितने टन का होता है?
भारत में सबसे आम सॉइल कंपैक्टर 11 टन की क्लास का है। डामर की फिनिशिंग के लिए 9 टन के आसपास का टैंडम रोलर और छोटे काम के लिए 2 से 3.5 टन का मिनी रोलर चलता है।
सबसे छोटा रोड रोलर कितने वजन का मिलता है?
लिस्टेड मॉडल में सबसे हल्का 1,575 kg का है। इससे छोटे काम के लिए रोलर की जगह प्लेट कंपैक्टर इस्तेमाल होता है, जिसे एक आदमी चलाता है।
क्या भारी रोलर से कॉम्पैक्शन ज़्यादा होता है?
हर बार नहीं। लेयर की मोटाई और माल के हिसाब से वजन चुना जाता है। डामर की पतली लेयर पर ज़्यादा भारी रोलर उसे तोड़ देता है और नरम मिट्टी पर मशीन धँस जाती है।
ऑपरेटिंग वेट और मैक्स ऑपरेटिंग वेट में क्या फर्क है?
ऑपरेटिंग वेट चलने लायक हालत का वजन है। मैक्स ऑपरेटिंग वेट उसमें छत, कैबिन या बैलास्ट जोड़ने के बाद का सबसे ज़्यादा वजन है।
आगे क्या देखें
वजन तय हो जाने के बाद अगला कदम मॉडल चुनना है। रोड रोलर की पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें। सारे मॉडल एक जगह कंपैक्टर लिस्ट में मिलेंगे।
यहाँ दिए गए वजन लिस्टेड मॉडल की स्पेसिफिकेशन से लिए गए हैं और वेरिएंट, ड्रम की चौड़ाई, कैबिन और लगे हुए सामान के हिसाब से बदल सकते हैं। खरीदने या ठेके में भरने से पहले मशीन की स्पेसिफिकेशन शीट या डीलर से नंबर एक बार पक्का कर लें।