ग्रेडर मशीन क्या है और इसमें क्या-क्या लगा होता है?
ग्रेडर में आगे दो पहिये होते हैं, फिर एक लंबा फ्रेम, और पीछे इंजन। ज़्यादातर ग्रेडर में पीछे हर तरफ दो-दो पहिये होते हैं, जिसे टैंडम कहते हैं, यानी कुल छह पहिये।
बीच में, फ्रेम के नीचे, ब्लेड होता है। इसे मोल्डबोर्ड भी कहते हैं। ब्लेड एक बड़े गोल छल्ले पर टंगा रहता है, जिसे सर्कल कहते हैं, और सर्कल के घूमने से ब्लेड का रुख बदलता है।
लंबाई ही इस मशीन की खूबी है। आगे का पहिया किसी उभार पर चढ़ता है तो ब्लेड, जो कई मीटर पीछे है, लगभग नहीं हिलता। इसलिए ग्रेडर ज़मीन के ऊँच-नीच की नकल नहीं करता, उसे सीधी लकीर में काट देता है।
ग्रेडर मशीन का काम क्या है?
सड़क बनाने में हर मशीन की अपनी बारी होती है। एक्सकेवेटर और डोज़र मोटी मिट्टी हटाते हैं, ग्रेडर उस ज़मीन को बराबर करता है, और फिर रोड रोलर उसे दबाकर पक्का करता है। ग्रेडर के मुख्य काम ये हैं:
- मिट्टी, मुरम या गिट्टी की परत को एक बराबर मोटाई में फैलाना।
- सड़क के बीच से किनारों की ओर हल्की ढलान बनाना, ताकि बारिश का पानी सड़क पर न रुके।
- सड़क के किनारे की नाली और कंधा (शोल्डर) काटकर आकार देना।
- बारिश के बाद कच्ची सड़कों के गड्ढे और लहरें बराबर करना।
- खदानों में डंपर चलने वाली सड़कों को रोज़ ठीक रखना।
हाईवे हो, गाँव की सड़क हो या खदान, काम यही रहता है। बदलता है मशीन का आकार।
ग्रेडर का ब्लेड कैसे काम करता है?
डोज़र का ब्लेड बस ऊपर-नीचे होता है। ग्रेडर का ब्लेड कई तरह से हिलता है, और यही उसकी असली ताकत है।
ऑपरेटर ब्लेड का बायाँ और दायाँ सिरा अलग-अलग ऊपर-नीचे कर सकता है, जिससे सड़क पर ढलान बनती है। सर्कल घुमाकर ब्लेड को तिरछा किया जाता है, ताकि माल ब्लेड पर लुढ़कता हुआ एक तरफ निकल जाए। ब्लेड आगे या पीछे झुकाया भी जा सकता है; Mahindra G75 Smart और Cat 120 में यह झुकाव 40 डिग्री आगे और 5 डिग्री पीछे तक है। ब्लेड को मशीन के बाहर की ओर खिसकाया भी जा सकता है, जिससे पहिये पक्की जगह पर रहते हैं और ब्लेड नाली तक पहुँच जाता है।
ब्लेड ज़मीन के नीचे भी काटता है। लिस्टेड ग्रेडर में यह गहराई 300 mm से 787 mm तक है। बराबर करने के लिए यह काफी है, खुदाई के लिए नहीं।
ग्रेडर मशीन कितने टन की होती है?
हमारी लिस्ट के 42 ग्रेडर में से 10 का कुल वजन 12 टन से कम है, 24 का 12 से 20 टन के बीच, और 8 का 20 टन से ज़्यादा। नीचे कुछ आम मॉडल हैं। सारे नंबर अक्टूबर 2026 की लिस्टेड स्पेसिफिकेशन से हैं।
| मॉडल |
कुल वजन (kg) |
इंजन (HP) |
ब्लेड की लंबाई |
ज़मीन के नीचे कटाई |
| Mahindra G75 Smart |
7,160 |
74 |
3,000 mm |
300 mm |
| Mahindra G9075 |
8,848 |
74 |
2,600 mm |
300 mm |
| Komatsu GD535-6 |
15,040 |
148 |
3,710 mm |
545 mm |
| Cat 120 |
15,699 |
156 |
3,700 mm |
775 mm |
| SANY STG170C-10 |
17,250 |
173 |
3,660 mm |
630 mm |
| SANY SMG200C-8 |
20,760 |
250 |
4,270 mm |
715 mm |
| Cat 24M |
65,840 |
533 |
7,300 mm |
657 mm |
हल्के ग्रेडर, 7 से 12 टन वाले, 74 से 150 HP के होते हैं। ये गाँव की सड़कों, नगर पालिका के काम और मरम्मत के लिए ठीक हैं। 12 से 20 टन वाले ग्रेडर ज़्यादातर करीब 3.7 मीटर के ब्लेड के साथ आते हैं और हाईवे जैसे बड़े काम के लिए बने हैं। 65 टन का Cat 24M बड़ी खदानों की चौड़ी सड़कों के लिए बना है, आम ठेकेदार के काम का नहीं।
ग्रेडर मशीन कैसे चलाते हैं?
केबिन में स्टीयरिंग, एक्सीलरेटर और ब्रेक होते हैं, जैसे किसी गाड़ी में। फर्क ब्लेड के कंट्रोल का है। पुराने ढंग के ग्रेडर में ऑपरेटर के सामने लीवरों की एक कतार होती है, और हर लीवर ब्लेड की एक हरकत संभालता है: बायाँ सिरा, दायाँ सिरा, सर्कल घुमाना, ब्लेड खिसकाना। नई मशीनों में इनकी जगह जॉयस्टिक आने लगे हैं। Cat 120 दोनों तरह में मिलता है, और Cat 14M3 में लीवर की जगह जॉयस्टिक ही हैं।
सड़क पर Mahindra G75 Smart 38 km/h तक और Cat 120 48.3 km/h तक चल लेता है, पर काम के समय ग्रेडर धीमे, नीचे के गियर में चलता है। पहले चक्कर में ब्लेड गहरा रखकर ऊँची जगह काटी जाती है, फिर माल फैलाया जाता है, और आखिरी चक्कर में ब्लेड हल्का रखकर सतह चिकनी की जाती है।
कुछ ग्रेडर का फ्रेम बीच से मुड़ता भी है। Komatsu GD535-6 का पिछला हिस्सा 25 डिग्री तक मुड़ता है, जिससे पहिये सड़क पर रहते हैं और ब्लेड किनारे की कच्ची ज़मीन पर काम करता है।
सीखने का सही तरीका वही है जो बाकी भारी मशीनों का है: पहले किसी अनुभवी ऑपरेटर के साथ बैठकर देखें, फिर खाली मैदान में ब्लेड के लीवर अलग-अलग चलाकर हाथ जमाएँ, और आखिर में फिनिशिंग का काम करें। लीवर और गियर की आदत कैसे पड़ती है, यह जेसीबी कैसे चलाते हैं वाले पेज पर भी समझाया गया है।
ग्रेडर और जेसीबी में क्या फर्क है?
जेसीबी, यानी बैकहो लोडर, खोदता है और मिट्टी उठाकर ट्रॉली में भरता है। ग्रेडर न गहरा खोदता है, न लोड करता है। वह सिर्फ सतह को बराबर और सही ढलान वाला बनाता है, पर यह काम वह जेसीबी से कहीं ज़्यादा तेज़ और सही करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रेडर मशीन का काम क्या है?
सड़क की मिट्टी और गिट्टी को बराबर फैलाना, सड़क पर पानी बहने लायक ढलान बनाना, किनारे की नाली काटना और कच्ची सड़कों की मरम्मत करना।
ग्रेडर मशीन कैसे चलाते हैं?
स्टीयरिंग और पैडल गाड़ी जैसे होते हैं। ब्लेड लीवरों या जॉयस्टिक से चलता है, जिसमें हर लीवर एक हरकत संभालता है। काम धीमे, नीचे के गियर में होता है।
ग्रेडर मशीन कितने टन की होती है?
लिस्टेड ग्रेडर 7,160 kg (Mahindra G75 Smart) से 65,840 kg (Cat 24M) तक के हैं। ज़्यादातर 12 से 20 टन के बीच आते हैं।
ग्रेडर मशीन की कीमत कितनी है?
कीमत मॉडल, इंजन और ब्लेड के आकार पर निर्भर है। हर मॉडल की ताज़ा कीमत ग्रेडर मशीन की कीमत वाले पेज पर देखें।
क्या ग्रेडर से खुदाई हो सकती है?
नहीं। उसका ब्लेड ज़मीन के नीचे 300 से 787 mm तक ही जाता है, और वह भी परत काटने के लिए। खुदाई के लिए एक्सकेवेटर या जेसीबी चाहिए।
आगे क्या देखें
ब्लेड, सर्कल और फ्रेम के हर हिस्से की पूरी जानकारी ग्रेडर मशीन वाले पेज पर है। पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें।
यहाँ दी गई स्पेसिफिकेशन और कीमत की जानकारी सांकेतिक है। ये वेरिएंट, जगह और तारीख के हिसाब से बदल सकते हैं, इसलिए खरीदने से पहले कंपनी या अधिकृत डीलर से एक बार पक्का कर लें। प्रकाशन के बाद बदली जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।