गाँव और कस्बों में चेन वाले हर एक्सकेवेटर को पोकलेन ही कहा जाता है, इसलिए नीचे के आँकड़े सभी कंपनियों की ऐसी मशीनों के हैं। ये औसत हैं। आपकी मशीन का असली खर्च ज़मीन, काम और ऑपरेटर तय करते हैं।
पोकलेन मशीन एक घंटे में कितना डीजल खाती है?
जवाब मशीन के वज़न वर्ग से शुरू होता है। हमारी साइट पर 294 एक्सकेवेटर लिस्ट हैं और उनमें से 97 के पेज पर औसत डीजल खपत लिखी है। जिन चार मॉडल के पेज पर खपत के दो अलग आँकड़े छपे हैं, उन्हें छोड़कर 93 मॉडल की गिनती नीचे है। वर्ग हर मॉडल के छपे ऑपरेटिंग वज़न से तय किया गया है, और जहाँ पेज पर खपत का दायरा लिखा है वहाँ पूरा दायरा गिना गया है।
| वज़न वर्ग |
गिने गए मॉडल |
पूरा दायरा (लीटर प्रति घंटा) |
ज़्यादातर मॉडल |
| मिनी, 6 टन तक |
22 |
2.5 से 6 |
3 से 5 (22 में से 17) |
| 6 से 10 टन (7 से 8 टन वाली) |
7 |
4 से 8 |
करीब 5 |
| 10 से 16 टन (12 से 14 टन वाली) |
14 |
6 से 14 |
8 से 14 (14 में से 12) |
| 16 से 25 टन (20 से 22 टन वाली) |
35 |
11 से 24 |
11 से 17 (35 में से 27) |
| 25 से 50 टन |
9 |
14 से 34 |
14 से 24 (9 में से 8) |
| 50 टन से ऊपर |
6 |
30 से 65 |
30 से 47 (6 में से 5) |
हर वर्ग में ऊपर और नीचे के सिरे के बीच दोगुने तक का फर्क है। इसलिए किसी एक नंबर को पक्का न मानें। इसे अपनी मशीन जाँचने का पैमाना समझें।
डीजल खपत घंटे में क्यों गिनी जाती है, किलोमीटर में क्यों नहीं?
क्योंकि पोकलेन चलकर नहीं, खड़े-खड़े खोदकर कमाती है। चेन वाली मशीन दिन भर लगभग एक ही जगह के आसपास रहती है, फिर भी पूरी शिफ्ट इंजन और हाइड्रॉलिक पंप चलते रहते हैं। इसीलिए इसमें ओडोमीटर नहीं, घंटा मीटर होता है। सर्विस, किराया, रीसेल और डीजल सब इसी घंटे से गिने जाते हैं।
बैकहो लोडर का हिसाब भी इसी तरह चलता है, उसके आँकड़े जेसीबी का माइलेज पेज पर हैं।
किस मॉडल का कितना डीजल लगता है?
नीचे की हर लाइन उस मॉडल के अपने प्रोडक्ट पेज से है। आखिरी कॉलम हमने टंकी को औसत खपत से भाग देकर निकाला है।
एक बात ध्यान से देखें। 20 से 22 टन की तीन मशीनों में पावर लगभग बराबर है, फिर भी औसत खपत 11, 14 और 15 लीटर लिखी है। पेज यह नहीं बताते कि आँकड़ा किस काम पर नापा गया। इसलिए दो मॉडल की तुलना सिर्फ़ इसी एक नंबर से न करें।
पोकलेन की एक टंकी कितने घंटे चलती है?
ऊपर की 20 टन वाली मशीनों में एक भरी टंकी 20 से 31 घंटे चलती है, यानी आठ घंटे की ढाई से चार शिफ्ट। मिनी मशीनों की टंकी छोटी होती है। हमारे गिने गए 22 मिनी मॉडल में से 18 की टंकी 15 घंटे से पहले खाली हो जाती है, इसलिए उसे लगभग रोज़ भरवाना पड़ता है। हर क्लास की टंकी का पूरा हिसाब एक्सकेवेटर की डीजल टंकी वाले पेज पर है।
अपनी पोकलेन का डीजल खुद कैसे नापें?
सबसे भरोसेमंद तरीका टंकी से टंकी तक का हिसाब है। इसके लिए कोई मशीन या ऐप नहीं चाहिए।
- मशीन समतल जगह पर खड़ी करें, टंकी पूरी भरवाएँ और घंटा मीटर की रीडिंग लिख लें।
- तीन-चार दिन रोज़ जैसा काम करें। इस बीच काम का तरीका न बदलें।
- उसी जगह फिर से पूरी टंकी भरवाएँ। लिखें कितने लीटर पड़े और घंटा मीटर कितना आगे बढ़ा।
- पड़े हुए लीटर को चले हुए घंटों से भाग दें। यही आपकी मशीन की असली खपत है।
मान लीजिए 20 टन की मशीन में दोबारा भरवाने पर 315 लीटर पड़े और घंटा मीटर 22.5 घंटे आगे गया। 315 को 22.5 से भाग दें, तो 14 लीटर प्रति घंटा आता है। हर दो-तीन महीने में यही हिसाब दोहराएँ। आँकड़ा बिना वजह ऊपर जाए, तो वह गड़बड़ी की पहली खबर है।
पोकलेन का डीजल अचानक क्यों बढ़ जाता है?
काम वही रहे और खपत बढ़ने लगे, तो इंजन उतने ही काम के लिए ज़्यादा ज़ोर लगा रहा है। जाँच इस क्रम में करें:
- चोक एयर फिल्टर। धूल वाली साइट पर सबसे आम और सबसे सस्ती वजह। फिल्टर के प्रकार एक्सकेवेटर के फिल्टर वाले पेज पर समझें।
- फ्यूल फिल्टर या इंजेक्टर की खराबी। साथ में काला धुआँ, मुश्किल स्टार्ट या लोड पर ताकत कम दिखेगी।
- हाइड्रॉलिक रिसाव। पाइप या सील से तेल रिसे, तो पंप को उतना ही दबाव बनाने के लिए ज़्यादा चलना पड़ता है।
- घिसे बकेट टीथ। कुंद दाँत मिट्टी काटने की जगह धकेलते हैं, और हर बकेट पर समय और डीजल दोनों बढ़ते हैं।
- चेन में फँसी मिट्टी। गीली साइट पर ट्रैक में जमी मिट्टी हर खिसकाव को भारी बना देती है।
पोकलेन का डीजल खर्च कैसे कम करें?
पहली बचत मुफ़्त है: खाली खड़ी मशीन का इंजन बंद करें या धीमा रखें। कई नई मशीनें यह खुद करती हैं। Hyundai R140L Smart Plus के पेज पर लिखा है कि मशीन 4 सेकंड खाली रहते ही इंजन अपने आप आइडल पर आ जाता है।
दूसरी बचत ऑपरेटर के हाथ में है। टिप्पर को इतना पास लगवाएँ कि हर बकेट के बाद मशीन को कम घूमना पड़े। हल्के काम पर इको मोड चलाएँ, और ब्रेकर लगाते समय ब्रेकर मोड चुनें, जो कई मॉडल में अलग से दिया होता है। लीवर चलाने का सही तरीका पोकलेन मशीन कैसे चलाते हैं पेज पर विस्तार से है।
तीसरी बचत सर्विस से आती है। समय पर एयर और फ्यूल फिल्टर बदलें, रिसाव तुरंत ठीक करवाएँ और काम के हिसाब से सही साइज़ की बकेट लगाएँ। नई मशीन लेने से पहले मॉडल और कीमत पोकलेन मशीन की कीमत पेज पर देखें।
आम सवाल
20 टन की पोकलेन एक घंटे में कितना डीजल खाती है?
आम तौर पर 11 से 17 लीटर। हमारी साइट पर 16 से 25 टन के 35 मॉडल में से 27 का औसत इसी दायरे में है।
मिनी पोकलेन एक घंटे में कितना डीजल लेती है?
6 टन तक की मशीनें ज़्यादातर 3 से 5 लीटर प्रति घंटा लेती हैं। हमारे 22 मिनी मॉडल का पूरा दायरा 2.5 से 6 लीटर है।
पोकलेन का माइलेज किलोमीटर में क्यों नहीं बताते?
क्योंकि यह मशीन चलकर नहीं, एक जगह खड़े होकर काम करती है। इसलिए खपत घंटा मीटर के हिसाब से लीटर प्रति घंटा में गिनी जाती है।
पोकलेन की एक टंकी कितने घंटे चलती है?
ऊपर की तालिका की 20 टन वाली मशीनों में 300 से 343 लीटर की टंकी है, जो औसत खपत पर 20 से 31 घंटे चलती है। ज़्यादातर मिनी मशीनों की टंकी 15 घंटे से पहले खाली हो जाती है।
ब्रेकर चलाने पर डीजल ज़्यादा लगता है?
हाँ। ब्रेकर पर हाइड्रॉलिक पंप लगातार दबाव पर रहता है, इसलिए खपत आम खुदाई से ऊपर जाती है। ब्रेकर मोड वाली मशीन में यह मोड ज़रूर चुनें।
इस पेज के डीजल खपत के आँकड़े प्रोडक्ट पेज पर लिखे औसत हैं; असली खपत मशीन, काम, ज़मीन, मेंटेनेंस और ऑपरेटर के हिसाब से बदलती है। स्पेसिफिकेशन सांकेतिक हैं, वेरिएंट, जगह और तारीख के साथ बदलते हैं, और खरीद का फैसला लेने से पहले कंपनी या अधिकृत डीलर से पक्का कर लेना चाहिए। प्रकाशन के बाद बदली जानकारी के आधार पर लिए गए फैसलों के लिए DesiMachines ज़िम्मेदार नहीं है।
पूरी मॉडल लिस्ट, स्पेसिफिकेशन और कीमत अंग्रेज़ी पेज पर देखें: Excavators। डीजल खर्च का पूरा हिसाब अंग्रेज़ी में: Excavator Fuel Consumption Per Hour।